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पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की विधानसभा अध्यक्ष ने तैयारियों को लेकर की समीक्षा बैठक

देहरादून में पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन आयोजित होना है , साथ ही इस सम्मेलन के लिए देशभर से कई दिग्गज शमिल होंगे। अतिथियों का ऋषिकेश में गंगा आरती के साथ-साथ दर्शनीय स्थलों का भ्रमण भी प्रस्तावित है। इसी संबंध में उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने बैराज स्थित कैंप कार्यालय में व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित उच्च अधिकारियों के साथ बैठक आहूत की। साथ ही विधानसभा अध्यक्ष ने अधिकारियों के साथ त्रिवेणी घाट का स्थलीय निरीक्षण भी किया।

इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन पहली बार उत्तराखंड में आयोजित हो रहा है जो कि हम सबके लिए एक जिम्मेवारी का विषय है। श्री अग्रवाल ने सभी अधिकारियों से उत्तराखंड की अतिथि देवो भव: की परंपराओं का निर्वहन करने की बात कही।अग्रवाल ने कहा कि अतिथियों के साथ संबंधित समन्वयक अधिकारी अपने राज्य से संबंधित सभी जानकारियों का अध्ययन कर लें साथ ही देहरादून हरिद्वार एवं ऋषिकेश में पर्यटन स्थल एवं दर्शन स्थलों के बारे में भी पूर्ण रूप से जानकारी प्राप्त कर ले जिससे कि अतिथियों को भ्रमण के दौरान किसी भी प्रकार की कोई समस्या ना हो। अग्रवाल ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि वह अतिथियों के साथ एक सेतु का काम करेंगे। सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि सम्मेलन की व्यवस्थाओं को लेकर किसी भी प्रकार की शिकायत को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि 19 दिसंबर को सम्मेलन में प्रतिभाग करने वाले सभी अतिथियों को ऋषिकेश में गंगा आरती, योग प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं भजन संध्या में प्रतिभाग कराया जाना प्रस्तावित है , साथ ही सभी अतिथियों के रात्रि भोज का आयोजन भी ऋषिकेश में ही किया जाना है। साथ ही 20 दिसंबर को कई अतिथियों का ऋषिकेश में पोस्ट कॉन्फ्रेंस में भ्रमण तय है।

साथ ही बताया कि सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा की जाएगी। अभी तक राज्यसभा के उपसभापति, 21 राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों, 5 राज्यों के विधान परिषद के सभापति, 27 राज्यों के विधानसभा उपाध्यक्ष, 2 राज्यों के विधान परिषद के उपसभापति एवं 25 राज्यों के विधानसभा सचिवों की सम्मेलन में प्रतिभाग करने की सहमति प्राप्त हो चुकी है।

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि कई राज्यों में विधानसभा सत्र चलने एवं चुनाव होने के कारण वहां के विधानसभा अध्यक्षों द्वारा सम्मेलन में उपस्थित होने की असहमति दी गई है। उन्होंने बताया की सभी राज्यों के विधान सभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति एवं उपसभापति के साथ उत्तराखंड विधानसभा के एक-एक समंवयक अधिकारी की ड्यूटी लगा दी गई है।

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