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गांव, गरीब, किसान को कोरोना संकट से उबारने के लिए किसान शक्ति संघ के 20 सुझाव

चौ.पुष्पेन्द्र सिंह

सारे विश्व को कोरोना महामारी के संकट ने घेर लिया है। इस संकट का सामना करने के लिए हमें सबसे पहले सभी देशवासियों की खाद्य सुरक्षा और भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए ग्रामीण भारत को मजबूत करना अति आवश्यक है। देशवासियों की सुरक्षा के लिए किए गए लॉकडाउन में ग्रामीण भारत और गरीबों को संबल देना अत्यंत आवश्यक है। ग्रामीण भारत को इस संकट से बचाने के लिए किसान शक्ति संघ ने बीस-सूत्री सुझाव सरकार के सामने रखे हैं। यदि इन सुझावों पर अमल किया गया तो लॉकडाउन के कारण देश की अर्थव्यवस्था, गांव, किसान, मज़दूर व गरीब पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Ch Pushpender singh

भारत की जीडीपी में घरेलू मांग की हिस्सेदारी 60% है। अतः इस संकट से निपटने और अर्थव्यवस्था को मंदी से निकालने के लिए घरेलू खपत को बढ़ाना अति आवश्यक है। ग्रामीण भारत में पहले ही लगभग 70% आबादी बस रही थी जो लॉकडाउन के बाद हुए पलायन के बाद अब लगभग 75% हो गई है। इस वक्त हमें ग्रामीण भारत में बसने वाली इस 75% आबादी की क्रय-शक्ति बढ़ानी होगी। इससे एक तो हमारी इस कमज़ोर आबादी को इस संकट का सामना करने की ताकत मिलेगी, दूसरा देश की अर्थव्यवस्था को मंदी से निकलने में भी मदद मिलेगी। पिछले दिनों सरकार ने ग्रामीण भारत के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के एक पैकेज की घोषणा की थी। परन्तु उसमें नई घोषणाएं केवल 73,000 करोड़ रुपये की ही थीं, बाकी 97,000 करोड़ रुपये का प्रावधान तो इस वित्त वर्ष के बजट में पहले से ही था- चाहे वह पीएम-किसान सम्मान निधि योजना हो, या मनरेगा योजना। यह बहुत बड़ा संकट है अतः सरकार को इससे कई गुना ज्यादा पैकेज की घोषणा करनी होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कोरोना व लॉकडाउन के संकट से बचाने के लिए ये हैं बीस-सूत्री सुझाव-

  1. पीएम किसान योजना की राशि को 6000 रुपये से बढ़ाकर 24,000 रुपये प्रति वर्ष प्रति किसान परिवार करें।
  1. किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट दोगुनी, ब्याज दर 1% करें।
  1. किसानों के सभी कर्ज़ों, किश्तों की अदायगी एक साल के लिए निलंबित करें।
  1. आज किसान और मज़दूर हमें भोजन उपलब्ध कराने के लिए जान पर खेलकर खेतों में काम कर रहे हैं। यदि कोरोना से किसी भी किसान, मज़दूर की मृत्यु होती है तो उनके परिवार को भी 25-25 लाख रुपये की मदद मिलनी चाहिए।
  1. कच्चा तेल सस्ता हो गया है अतः कृषि प्रयोग वाले डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी या छूट दें। कच्चा तेल सस्ता होने से रासायनिक उर्वरकों के दाम भी गिर जाते हैं। अतः पोटाश और डीएपी खाद पर 25% की छूट मिले।
  1. लॉकडाउन से किसान की आमदनी गिर गई है। अतः रबी की सारी फसलों की पूरी खरीद सुनिश्चित कर एमएसपी जे ऊपर 250 से 500 रु प्रति क्विंटल का बोनस दें।
  1. सभी जनधन खातों में अगले तीन माह तक 1000 रुपये प्रति माह भेजें।
  1. मनरेगा योजना के मजदूरों को कृषि कार्यों में लगाएं।
  1. आधार कार्ड को राशनकार्ड का दर्जा देकर कहीं से भी राशन का कोटा लेने की अनुमति दें।
  1. फरवरी के मूल्यों पर ही किसान का सारा उपलब्ध दूध खरीदें। इस दूध और दुग्ध उत्पादों को गरीबों, मरीज़ों, बच्चों, क्वारंटाइन केंद्रों में बांटे।
  1. कृषि कार्यों, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के रेट आधे करें।
  1. गन्ना किसानों का सारा गन्ना खरीदकर तुरन्त सारा बकाया भुगतान करें।
  1. मुर्गीपालन, मत्स्यपालन, व अन्य पशुपालन कर रहे किसानों की सप्लाई चेन, बिक्री की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलवाएँ।
  1. फल-सब्ज़ी की खेती करने वाले किसानों को मज़दूर और बाज़ार उपलब्ध करवाएं।
  1. किसानों-व्यापारियों को कहीं भी फसलों को खरीदने-बेचने की अनुमति दें।
  1. कृषि यंत्रों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कीटनाशक, खाद आदि पर लगने वाली जीएसटी समाप्त करें।
  1. पीएम ग्रामीण सड़क योजना का बजट 19,500 करोड़ रु से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रु करें जिससे गांवों में पलायन कर चुके लोगों को रोजगार मिल सके।
  1. पीएम ग्रामीण आवास योजना का बजट 19,500 करोड़ रु से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रु करें जिससे गांवों में पलायन कर चुके लोगों को रोजगार मिल सके।
  1. पीएम उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को छह माह तक मुफ्त सिलिंडर दें।
  1. विधवाओं, बुज़ुर्गों, दिव्यांगों के खाते में 1,000 रुपये अगले तीन महीने तक दें।

मुझे आशा है कि इन सुझावों के माध्यम से हम कोरोना संकट पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

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