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इक्कीसवां जन्मदिन मुबारक, बीसवीं सदी को

इसलिए नहीं कि 31वी तारीख चालू साल की आखिरी तारीख है और जिसे फिर दोहराया नहीं जा सकेगा, इसलिए भी नहीं क्योंकि, कुछ लोगों की राय में न तो यह जाने वाला और न ही आने वाला साल ‘हमारा’ है, लिहाजा हमें कुछ और सोचना चाहिए। मान लिया, लेकिन एक साल के रूप में किसी कालखंड की धार्मिक बुनियाद में पड़े बगैर यह जायजा लेना इसलिए मजेदार है कि भई बीते साल को क्या नाम दें और कल से दस्तक देने वाले आगत साल के लिए मन में किस तरह का स्पेस बनाएं?

चूंकि हम भारतीयों की सोच ज्यादातर मामलों में पारंपरिक होती है, इसलिए चीजों को नई नजर से देखना, समझना उसे पारिभाषित करना हमे बेकार का शगल लगता है। यूं कहने को इस बार भी तमाम लोग निवर्तमान वर्ष की शास्त्रीय समीक्षा में जुटे हैं। बनिए के बही खाते की तरह हानि-लाभ का हिसाब पेश किया जा रहा है। कुछ ज्यादा समझदार लोगों ने नए साल के चौघड़िए को अपने ढंग से बांचने और सेट करने की तैयारी भी शुरू कर दी है। लेकिन बाकी दुनिया बीत रहे साल और देहरी के बाहर खड़े साल को कुछ अलग और दिलचस्प अंदाज में देख और समझने की कोशिश भी कर रही है। और ये अंदाज पूरे साल को महामारी के स्यापे के तौर पर देखने और छाती कूटने से जुदा है।

अंग्रेजी में एक वेबसाइट ‘डिक्शनरी डॉट कॉम’ ने पाठकों के सामने यह सवाल उछाला कि साल 2020 को अगर एक शब्द में पारिभाषित करना हो तो कैसे करेंगे? वजह यह कि न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया ही कोविड 19 की महामारी से जूझती रही है। हमने साक्षात महसूस किया है कि कैसे एक अत्यंत सूक्ष्म वायरस ने पूरे विश्व को अपनी जीवनशैली बदलने पर विवश कर दिया। (यह बात अलग है कि अपने हिंदी वाले ऐसे पचड़ो में यह मानकर पड़ते ही नहीं कि बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय।)

बहरहाल जो जवाब मिले, वो वाकई मजेदार हैं। पहला शब्द था- अभूतपूर्व ( अनप्रेसीडेंटेड) आशय ये कि 2020 में जो कुछ और जिस तरीके से घटा, वह दुनिया के लिए एकदम  असाधारण और अप्रत्याशित था। दूसरा शब्द था- पेचीदा (एनटेंगलमेंट) साल। यानी पूरा वर्ष कई उलझनों में फंसा हुआ रहा। तीसरा शब्द था- अनूठा ( हिलेशियस) यानी अपनी तमाम नकारात्मकताओं के बाद भी पूर्ववर्ती सालों से काफी अलग। चौथा था-सर्वनाशी ( एपोकेलिप्टिक) अर्थात ऐसा साल जिसने काफी कुछ मिटाकर रख दिया और जो भविष्य का संकेतक भी है। पांचवा शब्द था-अव्यवस्था से भरा (ओम्नीशेम्बल्स)। ओम्नीशेम्बल्स शब्द दरअसल ब्रिटेन में बोली जाने वाली चालू अंग्रेजी का है। इसलिए हिंदी अनुवाद में थोड़ा फर्क हो सकता है।

यहां अनुवाद की प्रामाणिकता से ज्यादा अहम बात ये है कि इस व्यतीत हो रहे साल को हमने किस रूप में अनुभूत किया या कर रहे हैं? आने वाली पीढि़यों को यह वर्ष किस रूप में याद रहेगा या वो इसे याद करना चाहेंगी? पूर्वजों की मूर्खताओं के रूप में या मानवनिर्मित आपदाएं न्यौतने के रूप में? मानव सभ्यता की असहायता के रूप में या फिर मनुष्य मात्र के अहंकार को मिली सजा के रूप में? इस दृष्टि से सोचें तो वर्तमान 21वीं सदी का यह पहला साल रहा, जिसने पूरी दुनिया को एक साथ भीतर तक हिला कर रख दिया। ऐसा किसी हद तक पिछली सदी में द्वितीय विश्व युद्ध के समय जरूर हुआ था। लेकिन कुछ देश तब भी उससे अछूते रहे थे।

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