Uttar Pradesh , Uttarakhand News | उत्तर प्रदेश , उत्तराखंड की ताजा खबरें

उत्तराखंड की खूबसूरत दून घाटी में देखने को बहुत कुछ, एक बार आए तो बार-बार आओगे यहां

 

देहरादून : देवभूमि उत्तराखण्ड की अस्थायी राजधानी होने का गौरव प्राप्त करने वाला शहर देहरादून दून घाटी के रूप में भी जाना जाता है। यह एक अद्वितीय एवं खूबसूरत पर्वतीय क्षेत्र है। देहरादून से ही नजर आता है हरियाली ओढ़े मसूरी पर्वत का सौन्दर्य। देहरादून के पूर्व में गंगा नदी तथा पश्चिम में यमुना नदी हिलोरे लेती हैं। उत्तर-पूर्व में 3 हजार फीट तक की ऊंची कलिंग पहाड़ियां देहरादून की शोभा बढ़ाती हैं। प्राकृतिक सौन्दर्य समेटे पहाड़ियां, मंदिर, पशु-पक्षी प्रेमियां के लिए अभ्यारण्य, राफ्टिंग, ट्रेकिंग व पर्वतारोहण जैसे साहसिक खेल देहरादून की अपनी शान है। पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति एवं प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए पहचान बनाने वाला देहरादून समुद्रतल से 2156 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

उत्तराखंड राज्य में दून घाटी के बीच स्थित देहरादून भारत के दर्शनीय स्थलों में से एक है। उतराखण्ड राज्य की अस्थायी राजधानी देहरादून पर्यटकों के मध्य बहुत ही लोकप्रिय हिल स्टेशन है। फैमली वेकेशन, फ्रेंड्स टूर और कपल्स के घूमने के लिए उत्तराखंड की यह परफेक्ट हॉलिडे डेस्टिनेशन है। उतराखण्ड राज्य में गढ़वाल हिमालय की एक सुंदर पृष्ठभूमि पर स्थित देहरादून समुद्र तल से 1400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। भारत के दर्शनीय स्थल देहरादून के नजदीक एक और अन्य पर्यटक स्थल मसूरी भी हैं जो पर्यटकों को बहुत अधिक आकर्षित करता है।

देहरादून का इतिहास: देहरादून का इतिहास देखने पर पता चलता हैं कि देहरादून शहर का नाम दो अलग-अलग शब्दों “देहरा” और “दून” से मिलकर बना हैं। देहरा का अर्थ हैं घर और दून का अर्थ हैं हिमालय और शिवालिकों के बीच की घाटी है। गुरु रामराय ने अपने अनुयायियों के साथ जब देहरादून का दौरा किया तो इस स्थान पर एक डेरा (शिविर) स्थापित किया। माना जाता हैं कि लगभग इसी समय देहरादून शहर का विकास आरम्भ हुआ। कुछ इतिहासकारों का मानना हैं कि ‘देहरा’ का इस्तेमाल शिविर के संदर्भ में किया जा सकता है और फिर इस स्थान को ‘देहरादून’ नाम से जाना गया। देहरादून शहर में रामायण और महाभारत की प्राचीन कथाओं का भी उल्लेख देखने को मिलता है। हालांकि वर्तमान समय एक शैक्षिक केंद्र के रूप में देहरादून शहर का बहुत अधिक महत्व है।

देहरादून शहर कॉलेज और विश्वविद्यालय की बात करे तो 90 के दशक के प्रारंभ तक स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए मात्र 4 कालेज डीएवीपी पीजी कॉलेज, डीबीएस कॉलेज, केपी पीजी गर्ल्स कॉलेज और एसजीआरआर पीजी कॉलेज की स्थापना हुई थी। इसके अलावा देहरादून शहर के इतिहास में देहरादून, गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के कुछ भाग संयुक्त प्रांत का हिस्सा हुआ करते थे। जिन्हें बाद में उत्तर प्रदेश राज्य का नाम दिया गया। उत्तर-प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य (उत्तरांचल) को उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी जिलों से बाहर रखा गया और देहरादून को अंतरिम राजधानी के रूप में दर्जा दिया गया।

देहरादून ऐसे पर्यटकों के लिए बेहद ही खास हैं जो साहसिक गतिविधियों के शौकीन हैं और अपने दोस्तों या परिवार जनों के साथ एक रोमांचकारी ट्रिप पर जाना चाहते हैं। साथ ही साथ पहाड़ों, यहां का सूर्यास्त और मदमस्त कर देने वाली जलवायु का अनुभव ले सकते हैं। इसके अलावा देहरादून कई प्राचीन गुफाएं और प्राकृतिक झरनों से घिरा हुआ स्थान है। यहां एक लौकप्रिय रॉबर की गुफा जोकि पहाड़ियों से घिरी हुई एक प्राकृतिक गुफा हैं। यहां बर्फ के ठन्डे पानी का आनंद लें और देहरादून पर्यटन स्थल में आने वाले यात्री अपनी खूबसूरत पिक निकालने के लिए स्वतंत्र हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अन्य लोकप्रिय स्थल लच्छीवाला है। जहां पर्यटक एकान्त में बैठकर मानव निर्मित झील और उसके चारों ओर फैली घनी हरियाली का आनंद ले सकते हैं। यदि आप तैयार हैं तो लच्छीवाला नामक इस स्थान पर ट्रेकिंग और बर्डवॉचिंग की भी व्यवस्था है।

देहरादून शहर अपने पर्यटक स्थलों के लिए जाना जाता हैं। यहा कई स्थान आपको ऐसे मिलेंगे जो आपके मन को मोह लेंगे और आपका मन करेगा की अभी कुछ समय और यहा बिताया जाए। तो हम आपको देहरादून टूरिस्ट प्लेस की जानकारी देते हैं जहां आप घूमने जा सकते हैं-

सहस्त्रधारा: सहस्त्रधारा देहरादून का सर्वप्रिय पर्यटक स्थल पहाड़ों के घने जंगलों के बीच स्थित सहस्त्रधारा है। यहां का मुख्य आकर्षण पहाड़ी के अन्दर प्राकृतिक रूप से तराशी गई छोटी-छोटी गुफाएं हैं जिनसे अविरल बारिश जैसी बौछार होती रहती है। गुफाओं में इस प्रकार जल की धाराओं को बहने के कारण इस स्थल का नाम सहस्त्रधारा रखा गया। पहाड़ी से गिरते हुए जल को प्राकृतिक रूप से संचित किया जाता है। यहां गन्धक युक्त गर्म जल के एवं ठण्डे पानी के कुण्ड भी बनाये गये हैं। घाटी के मध्य होकर श्श्देव जन्याश्श् नदी बहती है। स्थानीय निवासियों के लिए एक रमणिक पिकनिक स्पोट है। दुर्लभ प्रकार की वनस्पति तथा कंदराओं की संरचना के आधार पर वनस्पति विज्ञान एवं भू-र्गभ विज्ञान के शोधार्थियों के लिए यह महत्वपूर्ण स्थल है। यहां पहुँचने के लिए देहरादून से नगर बस सेवा एवं अन्य परिवहन साधन उपलब्ध हैं।।

टपकेश्वर महादेव: देहरादून में बस स्टैण्ड से 5.5 किलोमीटर दूर तमसा नदी के तट पर स्थित है टपकेश्वर महादेव मंदिर गुफा। मंदिर गुफा में स्थित गुफा की छत से टपकता हुआ पानी सीधा शिवलिंग पर गिरता है। मंदिर के चारों ओर झरना बहता है। शिवरात्रि के अवसर पर यहां भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह उत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहते हैं।

गुरु रामराय दरबार: देहरादून के मध्य स्थित दरबार श्री गुरूरामराय जी महाराज का स्मारक धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व का स्थल है। गुरू जी राय के ज्येष्ठ पुत्र हर राय ने 1676 ई. में यहां ढेरा डाला था। यहां मुगल, राजस्थानी एवं कांगड़ा शैली की पेन्टिंग दीवारों पर देखने को मिलती हैं। पेटिंग्स में कृष्ण लीला, गीता, रामायण, महाभारत के दृश्यों के साथ-साथ हीर-रांझा, लैला-मंजनु, नूरजहां एवं ब्रिटेन निवासियों के चित्र देखने को मिलते हैं। यहां दरबार साहिब का हर वर्ष आयोजित ”झण्डा जी“ मेले में हजारों की संख्या में देश-विदेश से संगतें आकार शामिल होती हैं। यह मेला देहरादून का सबसे बड़ा मेला है। झण्डा जी के ऊपर शनील के गिलाफ चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं को कई वर्ष पूर्व आवेदन करने होते हैं, तब जाकर 20-25 साल बाद गिलाफ चढ़ाने का मौका आता है।

वन अनुसंधान संस्थान: देहरादून क्लाक से 7 किलोमीटर दूर राज्य का एक मात्र पुराना वन अनुसंधान संस्थान एवं वन महाविद्यालय वनस्पति प्रेमियों के आकर्षण का केन्द्र है। करीब 450 हैक्टेयर में फैले इस संस्थान में सात संग्रहालयों में वनस्पति विज्ञान से सम्बन्धित वस्तुओं-तत्वों का संग्रह दर्शनीय है। तिब्बत से लेकर सिंगापुर तक सभी प्रकार की वनस्पति यहां पाई जाती है। भवन का निर्माण वास्तुकार एडविन यूटिन्स द्वारा करवाया गया था। यह भवन ग्रीस, रोमन एवं पूर्वी देशों की भवन निर्माण कला का सुन्दर मिश्रण है। एशिया में यह अपने प्रकार का अलग ही भवन है। भवन का निर्माण 2.5 हैक्टयर में 210 खम्बों एवं ऊंची मेहराबों पर किया गया है। इस भवन को राष्ट्रीय विरासत घोषित किया गया है। इस स्थल के सौन्दर्य के महत्व का अन्दाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि यहां फिल्मकारों ने अनेक फिल्मों की शूटिंग की हैं।

मनड्रोलिंग मठ : मनड्रोलिंग मठ देहरादून के राजाजी नेशनल पार्क के निकट बनाया गया है। मठ में भगवान बुद्ध की 107 फीट ऊंची अद्भुत प्रतिमा स्थापित है। मठ की वास्तुकला आश्चर्य चकित करती है। मसूरी ”पहाड़ों की रानी“ कहे जाने वाला मसूरी पर्वतीय स्थल देहरादून से 38 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक खूबसूरत पर्यटक केन्द्र है। हरी-भरी पहाड़ियों के सुन्दर नजारे पूरे मार्ग में देखने को मिलते हैं। ब्रिटिश आर्मी केप्टन यंग ने 1827 ई. में इस स्थल की खोज की थी। यहां का वातावरण शांत एवं स्वच्छ है। मसूरी का सबसे प्रमुख एवं सर्वप्रिय पर्यटक स्थल कैम्पटी फाल है जो मसूरी से 15 किलोमीटर दूर 4500 फीट की ऊँचाई पर एक सुन्दर झरना है।

भारतीय सैन्य अकादमी: सैन्य अकादमी देहरादून में देहरादून-चकराता मार्ग पर 7 किलोमीटर दूर भारतीय सैन्य अकादमी यहां की अपनी विशेषता है। संस्थान का भवन वास्तुकला का विशिष्ट नमूना है। देश का यह एक मात्र ऐसा संस्थान है जहां देश की रक्षा हेतु कैडेट तैयार कर थल सैना में नियुक्ति दी जाती है। यहां भारत के मित्र राष्ट्रों बांग्लादेश, मालदीप, नेपाल, भूटान एवं नाईजीरिया आदि 22 देशों के छात्रों को भी प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। यहां संग्रहालय, पुस्तकालय, युद्ध स्मारक, गोला-बारूद शूटिंग प्रदर्शन कक्ष एवं गोल्फ कोर्स (18 हॉल) दर्शनीय हैं।

रॉबर्स केव: देहरादून से लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रॉबर्स गुफा एक प्राचीन अद्भुत गुफा हैं जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। 600 मीटर लंबी नदी की गुफा को यहां के स्थानीय लोग गुच्चुपानी के नाम से भी जानते हैं। रॉबर्स गुफा को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है। जिसकी उच्चतम गिरावट 10 मीटर लंबी आंकी गयी है। रॉबर्स गुफा अपनी अनूठी प्राकृतिक घटनाओं के लिए जाना जाता है। इस स्थान को गायब होने वाली धारा के रूप में भी जाना जाता है। कहते हैं कि इस स्थान का उपयोग ब्रिटिश राज्य के दौरान लुटेरे छुपने के लिए भी करते थे। राबर्स गुफा घूमने के लिए पर्यटकों को कोई शुल्क अदा नही करना होता हैं।

वहीं, लच्छीवाला भी यहां का एक लोकप्रिय पिकनिक डेस्टिनेशन माना जाता हैं। यहां की शानदार हरियाली और मानव गतिविधि के लिए यह स्थान बहुत अधिक चर्चा में रहता हैं। लच्छीवाला देहरादून शहर से एक छोटी ड्राइव पर स्थित है।

हर की दून देहरादून: हर की दून देहरादून शहर की हलचल से दूर स्थित एक खूबसूरत पालने के आकार की घाटी है जिसका सौंदर्य देखते ही बनता है। इस घाटी की ऊंचाई समुद्र तल से 3,566 मीटर हैं। यह स्थान पर्यटकों के लिए ट्रैकिंग भ्रमण की अधिकता प्रदान करता है। हर की दून घाटी को “देवताओं की घाटी” के रूप में भी जाना जाता हैं।

देहरादून कैसे पहुंचे?
हवाई जहाज से: देहरादून के हवाई अड्डे का नाम जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। देहरादून शहर से इस हवाई अड्डे की दूरी मात्र 31 किलोमीटर है, यह हवाई अड्डा लगभग देश के सभी प्रमुख हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है। अगर आप किसी दूसरे देश से देहरादून आने का कार्यक्रम बना रहे है तो आप को सबसे पहले दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आना होगा।

रेल से: देहरादून भारत के अन्य शहरों से रेल मार्ग द्वारा भी बहुत अच्छे तरीके से जुड़ा हुआ है। देहरादून रेलवे स्टेशन मुख्य शहर से बाहर 1-2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देहरादून रेलवे स्टेशन देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों से आप को देहरादून के लिए ट्रैन उपलब्ध मिल जाएगी।

सड़क मार्ग से: वैसे तो भारत के किसी भी कोने से आप देहरादून सड़क मार्ग द्वारा बहुत आसानी से पहुंच सकते है। लेकिन उत्तर भारत के प्रमुख शहरों से देहरादून की कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है दिल्ली, जयपुर और आगरा जैसे शहरों से देहरादून आने के लिए नियमित निजी बस सेवा और सरकारी बस उपलब्ध है। आप अपने निजी वाहन या फिर कैब के द्वारा भी बहुत आसानी से देहरादून पहुँच सकते है।

देहरादून के आस पास घूमने के लिए कुछ प्रसिद्ध पर्यटन स्थल: धनोल्टी, नई टिहरी, टिहरी झील, ऋषिकेश, नरेंद्र नगर, नाग टिब्बा, राजाजी राष्ट्रीय उद्यान, मालसी डियर पार्क, मसूरी, हरिद्वार, चम्बा, दशावतार मंदिर, जोरांडा फाल्स, बरेहिपानी और न्यू टेहरी टाउनशिप, माताटीला डैम और देओगढ़ किला बहुत बड़ी लिस्ट है। पर्यटक यहाँ पर कई एडवेंचर स्पोर्ट जैसे रिवर राफ्टिंग, बंजी जम्पिंग ,रॉक क्लाइम्बिंग, हाईकिंग और ट्रैकिंग का आनंद भी ले सकते हैं। यह कैंप पर्यटकों को रुकने के साथ साथ अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करते है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.