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आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में अपने दिल्ली मॉडल का जैम कर प्रचार कर रही है

आम आदमी पार्टी उत्तराखंड प्रदेश में अपने दिल्ली मॉडल का जैम कर प्रचार कर रही है | कभी दो, कभी चार नए पार्टी सदस्यों के साथ शहरी क्षेत्रों में दिल्ली मॉडल को सफल बताकर लोगों से समर्थन मांग रही है | लेकिन उत्तराखंड की जनता के लिए यह जानना आवश्यक है कि यह दिल्ली मॉडल है क्या| क्या विकास के किसी भी मापदंड पर आम आदमी पार्टी में कुछ कार्य किया है, यह जानकर ही जनता एक सोचा समझा निर्णय ले सकती है |

शिक्षा के क्षेत्र में आम आदमी पार्टी का दावा है कि उसने दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। इस परिवर्तन के संबंध में बहुत सारे लेख लिखे जा चुके हैं और सबका मत यही है कि केवल क्रांतिकारी परिवर्तन के नाम पर लीपापोती अधिक की गई है। चार स्कूलों को चमका कर और ९वी कक्षा में बच्चों को फेल कर बोर्ड का रिजल्ट सुधारा जा रहा है। उन दो चार स्कूलों की फोटो आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर वायरल कर कहते हैं कि दिल्ली के सारे स्कूल ऐसे ही हैं। अगर देखा जाए तो दिल्ली के अधिकतर स्कूलों में आज भी मूल सुविधाओं का अभाव है और आम आदमी पार्टी के कार्यकाल में ही दिल्ली के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी हुई है।

प्रतिशत में देखा जाए तो 2018 तक आम पार्टी के कार्यकाल में केंद्र सरकार के विद्यालयों और प्राइवेट स्कूलों में संख्या बढ़ रही थी, जब कि दिल्लीसरकार के स्कूलों में घटी थी |

अगर दिल्ली के स्कूलों में सुविधाएं बड़ी होती हैं तो बच्चों की संख्या में वृद्धि होती न की कमी, लेकिन २०१४ से २०१८ के बीच संख्या में १३२००० यानि ८% कमी आयी है | ये सारे आंकड़े सरकार ने ही दिए हैं |

उसी प्रकार नवी और ग्यारहवीं कक्षा में फेल होने वाले छात्रों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिस कारण 10वीं और 12वीं के रिजल्ट सुधार कर दुनिया को शिक्षा क्रांति का झुनझुना पकड़ा या जा रहा है। दिल्ली सरकार के स्कूलों में २५९००० बच्चे 2014 में कक्षा ९ में थे, जिनमे से लगभग 56% यानि आधे से अधिक २०१८ में १२वीं में पहुँचे ही नहीं ! अगर तुलना की जाए तो नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखण्ड की शिक्षा व्यवस्था भी दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था से काफी बेहतर है तो ऐसी स्थिति में आम आदमी पार्टी आखिर हमारी शिक्षा व्यवस्था को क्या सुधारेगी?

स्वास्थ्य के मुद्दे पर बात करें तो आम आदमी पार्टी का दावा था कि वह दिल्ली में 1000 मोहल्ला क्लीनिक के माध्यम से लोगों को मुफ्त में सुविधाएं देंगे। दिल्ली देश की राजधानी है और राजधानी होने के नाते पर पहले से ही बड़ी-बड़ी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसमें सफदरगंज, गंगाराम इत्यादि बड़े-बड़े अस्पताल सम्मिलित हैं। अब इन के दम पर उत्तराखंड से मुकाबला करने की बात करना निहायत बेवकूफी है।

दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक की बात करें तो 1000 मोहल्ला क्लीनिक खोलने का वादा किया गया था, लेकिन खुले मात्र 200 और उनमें से भी अधिकतर में डॉक्टर नदारद हैं, छुट्टी पर रहते हैं और वहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है।

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