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..तो कोई पिछड़े वर्ग का नेता होगा उत्तराखंड का नया बीजेपी अध्यक्ष!

देहरादून में प्रदेश अध्यक्ष चुनाव को लेकर हो रही रायशुमारी में हिस्सा लेते बीजेपी नेता और पदाधिकारी

देहरादून।। उत्तराखंड बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर रायशुमारी का दौर जारी है। बीजेपी के केंद्रीय पदाधिकारी विनय सहस्रबुद्धे और सरदार आरपी सिंह उत्तराखंड बीजेपी के नेताओं की राय जान चुके हैं। अब बारी है पर्यवेक्षक बनाए गए शिवराज सिंह चौहान और अर्जुन राम मेघवाल की। जो नेताओं से अंतिम रायशुमारी करेंगे। उम्मीद है कि नए साल से पहले ही प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी हो जाएगी। लेकिन इस घोषणा से पहले कई तरह की चर्चाएं तैर रही हैं। सबसे ज्यादा चर्चा किसी पिछड़े वर्ग के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की है।

केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची पिछड़े नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग

सूत्रों के मुताबिक पार्टी के कुछ बड़े नेता केंद्रीय नेतृत्व को राजपूत-ब्राह्मण से बाहर निकलकर किसी पिछड़े वर्ग के नेता को अध्यक्ष बनाने की पैरवी कर चुके हैं। इनकी दलील है कि राज्य में राजपूतों के बाद सबसे ज्यादा जनसंख्या पिछड़े वर्ग की है। लिहाजा कोई पिछड़े वर्ग के नेता को प्रदेश अध्यक्ष  बनाया जाना चाहिए। राज्य में तकरीबन 50 से 55 फीसदी राजपूत, 25 से 30 फीसदी पिछड़ी और 15 से 18 फीसदी ब्राह्मणऔर इसके अवाला अन्य जाति और धर्मों के लोग हैं।  लेकिन कम जनसंख्या और वोट बैंक होने के बावजूद ब्राह्मण सत्ता में राजपूतों के बराबर भागीदार हैं। जबकि पिछड़े वर्ग की सत्ता में भागीदारी बेहद कम है। इसलिए पार्टी का एक खेमा भीतरखाने किसी पिछड़े नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर दलितों-पिछड़ों के साथ हो रहे इस भेदभाव को कम करने की दलील दे रहा है। इस वर्ग के तीन नाम तेजी से तैर रहे हैं पहला नाम अल्मोड़ा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा,  दूसरा नाम पार्टी के प्रदेश महासचिव खजान दास और तीसरा नाम पूर्व सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता बलराज पासी का। जिनके नाम पहले से ही प्रदेश अध्यक्ष पद की रेस में शामिल हैं।

हालांकि पार्टी का एक दूसरा खेमा तेजी से वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को तेज तर्रार और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ वाला नेता बताकर उनके दोबारा अध्यक्ष बनने की चर्चा को आंच दे रहा है। और इसमें कोई दो राय भी नहीं कि अगर पार्टी किसी ब्राह्मण चेहरे को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाती है तो इसमें अजय भट्ट का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि भट्ट को इस मामले में कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत से सबसे कड़ी टक्कर मिल रही है। क्योंकि संघ नेताओं का मजबूत कुनबा प्रदेश अध्यक्ष के लिए वरिष्ठत्म विधायक बंशीधर भगत के नाम की पैरवी कर रहा है। भगत भी भीतरखाने इस रेस में तेजी से शामिल हो गए हैं।

मैंनें अपनी राय केंद्रीय नेतृत्व को दे दी है। मुझे पार्टी ने बहुत दायित्व दिए हैं और मैं कभी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटा हूं- अजय भट्ट, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष, बीजेपी

पार्टी क्या बनाएगी क्या नहीं मैंने कभी कुछ नहीं मांगा। मैं हर जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हूं- बंशीधर भगत, प्रदेश अध्यक्ष की रेस में शामिल वरिष्ठ विधायक

प्रदेश अध्यक्ष के नाम का फैसला केंद्रीय नेतृत्व को करना है। नेतृत्व जिनके नाम की भी घोषणा करेगा सभी को स्वीकार होगा- अजय टम्टा, अल्मोड़ा सांसद

बलूनी के रुख पर करेगा काफी कुछ निर्भर 

बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी और उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी भले ही स्वास्थ्य लाभ ले रहे हों। लेकिन बीजेपी के भीतर एक खेमा बेहद मजबूती से मानता है कि मोदी, शाह और नए कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के नाम के ऐलान से पहले उत्तराखंड में अपने सबसे करीबी नेता अनिल बलूनी की राय जरूर लेंगे। और बलूनी जिसके पक्ष में खड़े होंगे पलड़ा उसी का भारी होगा।

ये नाम चर्चा में

प्रदेश अध्यक्ष के लिए तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा नाम चर्चा में हैं। जिनमें अजय भट्ट, बंशीधर भगत, अजय टम्टा, बलराज पासी,  धन सिंह रावत, अरविंद पांडे, नवीन दुम्का, कैलाश शर्मा, सुरेश जोशी, केदार जोशी, कैलाश पंत, प्रकाश हर्बोला, गजराज बिष्ट, राजू भंडारी, सुरेंद्र जीना और पुष्कर धामी का नाम शामिल है। ये सारे नेता अपने विश्वस्त समर्थकों से खुद के प्रदेश अध्यक्ष की रेस में शामिल होने की बात कर रहे हैं।

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