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भाजपा ने अपनी ही ‘मेयर’ का गिराया मनोबल !

संगठन की आपसी इसी जोड़तोड़ की राजनीति ऋषिकेश नगर में भाजपा को अपनी पुरानी स्थिति में न पहुंचा दे। संगठन ये भूल गया है कि यहां राज्य गठन के बाद इस बार ही भाजपा को नगर में सीट मिली है, जिसका आरोप स्थानीय विधायक पर इस बार गंभीरता से लगा था।
जहां भाजपा राज्य में कांग्रेस से आए नेताओं को विधानसभा का टिकट देकर अपनी सरकार में लगभग सभी पुराने कांग्रेसी नेताओं को मंत्री पद दे रखा है, वहीं राज्य में भाजपा ने अपनी ही पार्टी की संगठन में जिलाध्यक्ष तक पहुंची और ऋषिकेश नगर निगम की पहली महिला मेयर बनी अनीता ममगाईं को एक मंडल अध्यक्ष तक का पद देना मुनासिब नहीं समझा। इससे मेयर और उनके करीबी कई भाजपा कार्यकर्ता संगठन के इस फैसले से नाराज बताए जा रहे हैं।
राज्य में भाजपा अब आपस में बंटती हुई दिखाई दे रही है। जिसका नुकसान पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनाव में दिख सकता है। इसमें संगठन ने इन मंडल अध्यक्षों के चयन में आग में घी डालने जैसा काम कर दिया है। जिसकी एक बानगी ऋषिकेश नगर निगम में भी देखने को मिली। यहां पहले तो पार्टी ने दो मंडल बनवा दिए। उसके बाद ये तय समझा जाने लगा कि एक मंडल पर विधायक और दूसरे पर मेयर के करीबी को जगह मिलेगी, पर संगठन ने किसी भी मंडल पर अपनी ही संगठन से जुड़ी मेयर के करीबी को कोई स्थान नहीं दिया। जिसका नतीजा ये हुआ कि निगम के वार्षिक महोत्सव में मंडल को कोई तवज्जो ही नहीं मिली। जबकि वहां खुद राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत आए थे।
बताते चलें कि ऋषिकेश नगर में अबतक मंडल अध्यक्ष के चयन में स्थानीय विधायक की ही चलती थी क्योंकि नगर में कभी भाजपा की सरकार ही नहीं बनी थी। जिसका आरोप विधायक और मंडल पर लगता हुआ आया था। लेकिन इस बार कई उठापटक, राजनैतिक जोड़तोड़ से भाजपा के स्थानीय विधायक के विरोध के बावजूद भी नगर में भाजपा की सरकार बन गई, लेकिन मंडल अध्यक्ष के चुनाव में स्थानीय विधायक ने अपनी राजनैतिक उंगली जारी रखी। सबसे पहले तो निगम में संगठन के संविधान के खिलाफ दो मंडल बनवा दिए गए, उसके बाद दोनों ही मंडलों में से किसी एक मंडल पर भी मेयर के करीबी को कोई जगह नहीं दी गई। अब जब पार्टी उसी विधायक के इशारे पर संगठन में पद देगी, जिनपर नगर में भाजपा को कमजोर करने के गम्भीर आरोप लगे हो, ऐसे में भाजपा दोबारा नगर में अपना परचम कैसे लहरा पाएगी। वहीं ऋषिकेश विधानसभा में तीन बार बन चुके विधायक और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल का आगामी 2022 के चुनाव में अपनी इसी हिटलरशाही का विरोध 2017 से भी ज्यादा भयावह तरीके से देखना पड़ सकता है, जिसका खामियाजा भाजपा को भारी पड़ने की संभावना है।
वहीं अब ऋषिकेश नगर निगम में पहले तक स्थानीय विधायक का विरोध महिला मेयर को झेलना पड़ता था, अब माननीय विधायक अपने मंडल अध्यक्षों से भी महिला मेयर का विरोध शुरू करवाएंगे और पार्टी को अब नगर में ही नहीं विधानसभा स्तर पर भी कमजोर करने की कोशिश करेंगे। इसीलिए भाजपा की 2002 वाली स्थिति 2022 में होने की संभावना पैदा हो गई है।

(योगेश डिमरी की फेसबुक वॉल से)
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