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…लेकिन वैभव कृष्ण की यह शानदार पारी क्यों याद रहेगी

उत्तर प्रदेश में सभी सर्विस कैडर के अफसर गौतमबुद्ध नगर या कहें नोएडा में पोस्टिंग पाना चाहते हैं। यहां पोस्टिंग पाना आसान नहीं तो पोस्टिंग मिलने के बाद जिला चलाना कहीं और ज्यादा मुश्किल है। इस जिले के छोटे से इतिहास में तरक्की की चकाचौंध पर ग्रहण लगते एक से बढ़कर एक स्याह पन्ने भी हैं। निठारी कांड, आरुषि हत्याकांड, घोड़ी बछेड़ा और भट्टा परसौल कांड से लेकर विकास प्राधिकरणों में अरबों-खरबों के घोटाले। यह जिला यूपी तो क्या शायद देश में अकेला होगा, जहां कलेक्टर को गोली लगी और कप्तान स्ट्रेचर पर अस्पताल पहुंच गए। सूबे की चीफ सेक्रेटरी और सरकारों को अपने दम पर चलाने वाले नौकरशाह सजायाफ्ता हो गए।

इस जिले की कमान ठीक एक साल पहले 7 जनवरी 2019 को वैभव कृष्ण को सौंपी गई। वैभव कृष्ण ने इस एक साल में वह सब करके दिखाया, जो करना तो हर कप्तान चाहता है लेकिन न जाने किन और कितने दबावों में कर नहीं पाता है। सरकार और आम आदमी के लिए नासूर बन चुके बिल्डरों को जेल भेजा, जो एक वक्त के बेताज बादशाह थे। लेकिन, वक्त ठहरता नहीं, बदलता है। उन बिल्डरों का भी वक्त बदला। जो कभी कप्तान के घर-दफ्तर तो क्या पांचवें तल पर बे-रोक-टोक जाते थे, वह वैभव के घर तो आए लेकिन वहां से जेल चले गए।

गौतमबुद्ध नगर के लोग कहते हैं वैभव कृष्ण के दफ्तर में पावरफुल विजिटिंग कार्ड वाले बाद में और बिना परिचय वाला आम आदमी पहले बुलाया जाता है। लाखों लोगों को ठगकर अरबपति बने चीटर भी जेल में बैठे हैं। सड़कों पर उत्पात मचाने वाले, खुलेआम सड़क और कारों में शराब पीने वाले, बाजारों में बीच सड़क कार खड़ी कर शॉपिंग जाने वाले, मसाज पार्लरों के अवैध धंधे, सट्टेबाज, फर्जी कॉल सेंटरों और नशे की तस्करी करने वालों पर जैसी कार्रवाई पिछले एक साल में हुई, वैसी कभी नहीं हुई। इन अवैध धंधों की सरपरस्ती करने वालों को भी नहीं छोड़ा, भले ही वे अपने पुलिस वाले थे या पत्रकार।

हर कोई नोएडा की पोस्टिंग पाना जिस वजह से चाहता है, उस वजह ने वैभव कृष्ण को छुआ तक नहीं। गौतमबुद्ध नगर अरसे से संगठित अपराध से प्रभावित रहा है। इस बीमारी का ईलाज करना तो दूर कभी किसी कप्तान ने इस बात स्वीकार भी नहीं किया। वैभव कृष्ण ने संगठित अपराध और गैंगस्टर्स को लगाम लगाने के लिए शानदार काम किया। शानदार पुलिसिंग तो अब बॉलीवुड फिल्मों में ही देखने को मिलती है, जहां ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, विलेन की खाल उधेड़ने वाला और मूछों पर ताव देने वाला एसपी होता है। अगर पुलिस वाला ऐसा होना चाहिए तो वाकई वैभव ऐसे हैं। वह 10 बरसों की नौकरी में दूसरी मर्तबा सस्पेंड हुए हैं।

शायद यही वजह रही कि उनसे जुड़े नितांत निजी मसले के सार्वजनिक हो जाने के बावजूद जिले के लोगों और सिविल सोसायटी ने खुलकर उनका समर्थन किया। वैभव ने पुलिस का जो भी कायदा तोड़ा है, वह यूपी पुलिस देख लेगी, सजा भी देगी और मिलनी भी चाहिए। लेकिन, वैभव कृष्ण को निस्संदेह ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अफसर के रूप में नैतिक समर्थन मिलता रहेगा। हां, उनकी एक शानदार पारी का दुखद अंत हुआ है। नई पारी का इंतजार रहेगा।

अंत में एक बात बता दूं, पिछले एक साल में मुझे जो गलत लगा, वह गलत कहा और सीधे उनसे ही कहा।

पंकज पराशर की एफबी वाल से

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