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वाह री! भारतीय राजनीति…

वाह री वाह भारतीय राजनीति। बस मैं ही मैं और कुछ नहीं। जिस जनता ने जनादेश दिया उसका कोई मान नहीं। बस मेरा और मैं ही सर्वोपरि। जनता का मान भाड़ समान।

किस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी ने सूरज के भी उगने की भी प्रतीक्षा न की और सरकार बना दी। सूरज उगा और उसने भी अपने को ठगा सा महसूस किया। जिसने भी सुना अपने हथप्रभ और स्तब्ध सा महसूस किया। आखिर क्या मजबूरी थी जो सूरज के उगने का भी इंतजार नहीं किया गया? और कुर्सी पर चढ़ बैठे। भारतीय जनता पार्टी अपने को भारतीय राजनीति का चाणक्य कहती है फिर भारतीय जनता पार्टी का वह चातुर्यपन/चाणक्यपन कहाँ गया? कहाँ मार खा गए बीजेपी के चाणक्य?

महाराष्ट्र में राजनीति का जो चीर हरण उद्धव ठाकरे, शरद पवार, कांग्रेस तथा अजित पवार द्वारा किया गया यह भारतीय राजनैतिक इतिहास में कालाक्षरों में लिखा जाएगा। जिस प्रकार का खेल शरद पवार द्वारा खेला गया उसने भारतीय राजनीति को बहुत कुछ सिखा दिया है और उद्वेलित कर दिया। शरद दिन के उजाले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलता था और रात के अंधेरे में 10 जनपथ। शरद ने राजनीति के तथाकथित राजनीतिज्ञों और चाणक्यों को बहुत कुछ सिखा दिया है। राजनीति यदि यही कहती है बोलो कुछ और करो कुछ तो कोई अतिशयोक्ति नहीं।

शरद ने देखा कि सरकार बनाने के लिए बीजेपी के पास बहुमत नहीं और शिवसेना अड़ी हुई है कि मुख्यमंत्री उन्हीं का होगा। सिद्धान्तों की कोई लड़ाई नहीं, सिर्फ और सिर्फ कुर्सी चाहिए। वो भी येन केन प्रकारेण। शरद ने नरेंद्र मोदी के पैर पकड़े तो शिवसेना भड़क गई। शिवसेना का बड़ा बयान आया कि इस पर विश्वास न किया। यह बिन पेंदे का लोटा है। शरद ने कोई बयान नहीं दिया और भतीजे को चुपचाप बीजेपी की शरण में जाने दिया एक सोची समझी राजनीति के तहत। और बीजेपी को कह दिया कि सूरज के उगने के पूर्व शपथ ले लें। नासमझ बीजेपी ने आनन फानन में शपथ ले ली। राज्यपाल भगत सिंह कोस्यारी की भी मति जैसे कि भ्रष्ट हो गई और जीवन भर का कमाया पुण्य सेकंडों में गवां दिया।

अजित पवार को उप मुख्यमंत्री की शपथ दिलवा दी। जैसे ही भतीजे को शपथ दिलवाई गई वैसे ही दूसरे दरवाजे से फिर उद्धव ठाकरे और अहमद पटेल के साथ प्रेस कांफ्रेंस कर दी कि बीजेपी ने लोकतन्त्र की हत्या कर दी है। अब बीजेपी बहुमत सिद्ध करे। बीजेपी को भी जैसे सांप सूंघ गया। कुछ नहीं सूझा। अपने को ठगा सा महसूस किया।

अब जो वीर शिवाजी की धरती पर राजनीति का नँगा नाच हुआ वह यह कि उद्धव ठाकरे को बिना जनादेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल गई।और बीजेपी को सत्ताच्युत कर दिया।

अब देखना यह है कि तीन अलग अलग विचारधाराओं का यह सिर्फ सत्ता के लिए गठबंधन कितने टिका रह पाता है। उद्धव ठाकरे रातों रात राम मंदिर बनता देखना चाहते हैं सोनिया गांधी कभी भी भारत में राम मंदिर बनता नहीं देखना चाहती हैं क्योंकि यदि राम मंदिर बन गया तो बीजेपी की पौ बारह है। शरद पवार का राम मंदिर और हिंदुओं से कोई लेना देना नहीं है। उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में सिर्फ मराठों को देखना चाहते हैं और उत्तर भारतीयों से नफरत करते हैं जबकि सोनिया गांधी को पूरे भारत की राजनीति करनी है और सभी देशवासियों को समान रूप से देखना है जबकि शरद पवार महाराष्ट्र में सिर्फ किसानों की राजनीति करते हैं। इस प्रकार से यह अलग अलग विचारधारा वाले लोग कितने दिन आपस में एक रह पाएंगे यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ उत्तर है। जैसे ही यह बेमेल का गठबंधन बना, शिवसेना के अंदर से इसके विरोध की आवाज उठनी शुरू हो गई है और महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी जिसे जनता ने मतदान किया क्या वह इस अवसरवादी राजनीति को चुपचाप सहन कर लेगी? यह भी एक यक्ष प्रश्न है जिसका उत्तर भविष्य के गर्भ में है। एक कहावत है आखिर उद्धव कितने दिनों तक बेमेल विचारधारा के साथ अपने को जिंदा रख पाते हैं या कब तक वे इस गठबंधन के साथ तिल तिल मर कर रह सकेंगे। कहीं उनका भी वही हश्र न हो, जो नीतीश कुमार का हुआ था। नीतीश कुमार ने भी अपने को नरेंद्र मोदी के समकक्ष मानना शुरू कर दिया था और फिर हाथ पकड़ा था लालू प्रसाद यादव का। जब भूल मालूम हुई तो कहावत याद आई लौट के बुद्धू घर को आये।

अब देखना यह है कि महाराष्ट्र का यह तथाकथित शेर कब बकरी बन बीजेपी की शरण पड़ेगा।

कई बार यह सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ कि आखिर वह कौन सलाहकार है बीजेपी में जिसने अजित पवार के साथ सरकार बनाने की सलाह दी और बीजेपी की स्वच्छ धवल छवि को नुकसान पहुंचाने का कृत्य किया और सभी ने उसकी सलाह भी मान ली। बीजेपी का प्रत्येक कार्यकर्ता इस कुकृत्य से नाराज है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि कोई तो शकुनि बीजेपी के अंदर है जो प्रधानमंत्री मोदी की भारत विजय के सपने को रोकने की कोशिश कर रहा है मोदी की छवि को धूमिल करने की दिशा में कार्य कर रहा है। बीजेपी को उस शकुनि को चिंहित करना होगा, पहचानना होगा, पहचान करानी होगी।

महाराष्ट्र की जनता ने बीजेपी शिवसेना गठबंधन को यह जनादेश दिया था कि वह सरकार बनाये किंतु उद्धव की अति महवाकांक्षा ने उस जनादेश का घोर अपमान किया है। जो अक्षम्य है।

( चंदर रावत की फेसबुक वॉल से साभार )

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