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चौरासी कुटी अपने आप में ही अलग पहचान रखती है, जाने यहां क्या है खास ?

अपनी अलग पहचान रखने वाले राजाजी टाइगर रिजर्व की गौहरी रेंज में स्थित चौरासी कुटी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। कोरोना काल में सात माह तक चौरासी कुटी में भी गतिविधियां बंद रही, लेकिन अनलॉक की प्रक्रिया में चौरासी कुटी को खोले खोलने के बाद बड़ी संख्या में पर्यटकों ने इस तरफ अपना रुख किया। भावातीत ध्यान योग के प्रणेता और महान योगी महर्षि महेश योगी ने वर्ष 1960 के आसपास ऋषिकेश में गंगा के बायें ओर स्वर्गाश्रम क्षेत्र में शंकराचार्य नगर की स्थापना की थी, जिसे बाद में चौरासी कुटी के नाम से विश्व भर में पहचान मिली।

जब यहां आए थे विदेशी पर्यटक

साल 1967 से 1968 के बीच अमेरिका के प्रसिद्ध रॉक म्यूजिक बैंड बीटल्स के चार सदस्य जॉन लेनॉन, पाल मेकार्टनी, जॉर्ज हैरिसन और रिंगो स्टार यहां आए। यहां रहते हुए इस मशहूर म्यूजिक बैंड ने यहां कई गीतों तथा यादगार धुनों की रचना की। जिसके बाद चौरासी कुटिया की ख्याति पूरी दुनिया में फैल गई और विदेशों से बड़ी संख्या में पर्यटक योग और ध्यान सीखने के लिए यहां आने लगे। इसी दौर में ऋषिकेश को योग नगरी के रूप में विश्व पटल पर एक नई पहचान मिली। 1982 में राजाजी पार्क की स्थापना के बाद शंकराचार्य नगर, पार्क के अधीन आ गया।

लॉकडाउन का असर यहां भी देखने को मिला

यहां तमाम गतिविधियां धीरे-धीरे बंद हो गई। लंबे अरसे तक यह स्थान वीरान रहा, लेकिन इस धरोहर के प्रति देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण कम नहीं हुआ। आखिरकार वन विभाग ने करीब 35 वर्ष तक वीरान रही इस धरोहर को वर्ष 2015 में पर्यटकों के लिए खोल दिया। चौरासी कुटी खुलने के बाद से ही यहां पर्यटकों की आमद बढ़नी शुरू हो गई। आज चौरासी कुटी, राजाजी टाइगर रिजर्व की आमदनी का बड़ा स्त्रोत बन गई है।

राजस्व को बढावा देने में सहायक है चौरासी कुटी

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते 23 मार्च को देश भर में लागू किए गए लॉकडाउन के साथ चौरासी कुटी में भी पर्यटक गतिविधियां बंद हो गई थी। सात माह बाद 16 अक्टूबर को चौरासी कुटी को फिर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। इसके बाद पर्यटकों का आना जाना यहां शुरू हो गया, जो निरंतर जारी है। अब तक 8,840 भारतीय और 48 विदेशी पर्यटक यहां घूमने के लिए आ चुके हैं, जिनसे कुल सात लाख 48 हजार 10 रुपये का राजस्व भी राजाजी टाइगर रिजर्व की झोली में आया है।

चौरासी कुटी में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक महर्षि महेश योगी तथा बीटल्स ग्रुप से जुड़ी यादों को महसूस करने के लिए आते हैं। विदेशी पर्यटकों से शुल्क के रूप में खासी आमदनी भी प्राप्त होती है। मगर, कोरोना संकट के कारण अभी विदेशी पर्यटक भारत नहीं आ रहे। जिससे यहां भी विदेशी पर्यटकों की आमद अभी तक बेहद कम है।

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