Uttarakhand News | उत्तराखंड की ताजा खबरें

उत्तराखंड में करीब 5000 लोग कोरंटाइन में, रखी जा रही कड़ी निगरानी

कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रदेश में करीब पांच हजार लोगों को होम और फैसिलिटी कोरंटाइन में रखा गया है. इनमें से ज्यादातर लोग अन्य राज्यों से आए हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, राज्य में कुल 5165 लोगों को होम और फैसिलिटी कोरंटाइन में रखा गया है. सचिव स्वास्थ्य नितेश झा ने बताया कि राज्य में कोरोना का संक्रमण न फैलने पाए इसके लिए बाहर से आए लोगों की निगरानी बढ़ाई जा रही है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की सर्विलांस टीम के साथ ही कई स्तर पर लोगों की निगरानी बढ़ाई जा रही है. कोरोना संक्रमण की आंशका को देखते हुए राज्य के अस्पतालों में कुल 69 लोगों को भर्ती कराया गया है, जिनमें से 47 लोगों में कोरोना जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं जिसके बाद इनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं. अभी राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या सात है.

फ्रंटलाइन वारियर्स को चार लाख रुपये के बीमा लाभ की मंजूरी

कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव कार्यों में लगे 68457 फ्रंटलाईन कार्मिकों को चार-चार लाख रुपये का बीमा लाभ दिया जाएगा. मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसकी स्वीकृति दे दी है. एक वर्ष की अवधि के लिए इस पर 17.02 करोड़ रुपये का व्यय आएगा, जिसका वहन मुख्यमंत्री राहत कोष से किया जाएगा. वहीं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों का बीमा केंद्र सरकार के स्तर से किया जा चुका है. राज्य सरकार के स्तर पर बीमा लाभान्वितों में 22523 पुलिस कार्मिक, 7988 सफाईकर्मी, 14595 आंगनबाड़ी कार्यकत्री, 14376 आंगनबाड़ी सहायिका, 4924 मिनी आंगनबाड़ी सहायिका, 464 सुपरवाईजर, 78 सीडीपीओ, 09 डीपीओ, जीएमवीएन व केएमवीएन के 3000 कार्मिक, एसईओसी/डीईओसी के 500 कार्मिक शामिल हैं. इनके अलावा मीडिया कर्मियों के लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी.

दूसरे राज्यों में फंसे प्रदेशवासियों की मदद के लिए सरकार ने साधा संपर्क

देशव्यापी लाकडाउन के चलते दूसरे राज्यों में फंसे 1800 से ज्यादा लोगों की मदद के लिए प्रदेश सरकार ने 16 राज्यों से संपर्क कर मदद मांगी है. उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य से बाहर फंसे लोगों की मदद के लिए नोडल अफसर नियुक्त किए गए शैलेश बगौली ने कहा है कि जिन-जिन राज्यों में हमारे प्रदेश के लोग फंसे हैं, उनके लिए वहीं मदद की व्यवस्था की जा रही है. बगोली ने बताया कि सभी राज्यो को ईमेल, वाट्सअप और व्यक्तिगत फोनकर राज्य के लोगों की सहायता का अनुरोध किया है. उन्होंने बताया कि सभी राज्यों ने भरपूर सहयोग का आश्वासन दिया है. 24 मार्च की रात को हुए देशव्यापी लाकडाउन के बाद उत्तराखंड के 1800 से ज्यादा लोग देश के विभिन्न स्थानों में फंसे हुए हैं. इनमें से बड़ी संख्या उन लोगों की है जिनके पास रहने और खाने की व्यवस्था नहीं है. रविवार दिन से आज दिन तक 3586 लोग पुलिस लाइन स्थित कंट्रोल रूम में फोन कर मदद की गुहार लगा चुके हैं. इनमें से 1891 लोग दूसरे राज्यो में तथा 1695 लोग प्रदेश के भीतर अलग-अलग स्थानों में फंसे हैं.

प्रदेश की सीमाएं पैदल चलने वालों के लिए भी सील

देशव्यापी लाकडाउन के बाद पैदल लोगों की बढञती संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को सीमाएं सील करने के सख्त निर्देश दिए हैं, जिसके बाद उत्तराखंड की सीमाएं भी पैदल चलने वालों, साइकिल वालों के लिए सील कर दी गई हैं. देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर जिलों की उत्तर प्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश से लगने वाली सभी सीमाओं को सील कर, अति आवश्यक सेवाओं को छोड़कर किसी भी तरह की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है. राज्य के भीतर जिलों में भी सीमाओं को सील कर लोगों के आने जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पांच माह का वेतन दान करने की घोषणा की.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री राहत कोष में अपने पांच माह का वेतन देने की घोषणा की है. उनकी पत्नी सुनीता रावत ने एक लाख रुपये तथा पुत्रियों कृति एवं श्रृजा ने 52 हजार रुपये की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में दी है.

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