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दिल्ली के सरकारी स्कूलों की हालत पर बात करने से सहम गए मनीष सिसोदिया!

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पिछले 1 महीने में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड, दोनों राज्यों में आकर सरकार को चुनौती दे चुके हैं कि वह सरकारी स्कूलों की स्थिति पर उनसे बहस करें। हालांकि जब यही चुनौती उनको दी गई तो दिल्ली के शिक्षा मॉडल के प्रचारमंत्री सिसोदिया सहम गए ! सिसोदिया द्वारा हाल में दी गयी चुनौती के क्रम में जब उत्तराखंड के मंत्री मदन कौशिक ने चुनौती दी कि वे दिल्ली में ही, दिल्ली के सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सिसोदिया से बहस करेंगे, तो सिसोदिया ने डर के मारे मना कर दिया।

इस सम्बन्ध में आम आदमी पार्टी, उत्तराखंड की सिट्टी पिट्टी भी गुम है । यह तो सीधी सी बात है कि अगर आम पार्टी वाले अपने दिल्ली मॉडल का इतना ढोल पीटते हैं तो पहले सिद्ध करना चाहिए कि दिल्ली मॉडल बड़ा ही अच्छा है और इससे शिक्षा में आयी तथाकथित क्रांति का प्रमाण भी देना चाहिए। इस संबंध में चर्चा से डरने का अर्थ है कि आपको अपने तथाकथित मॉडल पर ही पूरा विश्वास नहीं है। दरअसल विभिन्न मीडिया स्रोत, जिनमे इनके प्रिय वामपंथी स्रोत भी हैं, “दिल्ली मॉडल” के शिक्षा क्रांति के झूठे दावे को पहले ही नग्न कर चुके हैं | ऐसे में यह स्वाभाविक है कि इस पर बहस के सवाल पर सिसोदिया और उनके चिंटुओं की नींद उड़ जाये |

एक पाकिस्तानी सेनेटर के शब्दों में कहें तो सिसोदिया के “पैर कांपने लगे और माथे पर पसीना छूट आया”| अंततः, आम पार्टी और उनके नेताओं ने इस चर्चा से साफ़ मना कर दिया | ऐसे में जब सिसोदिया दूसरे राज्यों में उनकी सरकारों को चुनौती दे रहे हैं, उनके द्वारा दूसरों की चुनौती को स्वीकार करना दिल्ली मॉडल की असफलता को इंगित करता है। साथ ही यह आम पार्टी के दोहरे चरित्र का प्रमाण भी है | आम आदमी पार्टी, उत्तराखंड के नेताओं से जवाब देते नहीं बन रहा है कि कल तक शेर बन रहे सिसोदिया आखिर मुस की तरह अपने बिल में क्यों घुस गए हैं और चुनौती का सामना क्यों नहीं कर रहे!

एक बार अपने तथाकथित दिल्ली मॉडल की श्रेष्ठता सिद्ध करने के बाद निश्चित रूप से वे अन्य राज्यों की शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्न भी उठा सकते हैं और उस पर बहस करने के अधिकारी भी हैं, परंतु उसके पहले उन्हें अन्य राज्यों की शिक्षा व्यवस्था पर टीका टिप्पणी करने का सिसोदिया का कोई नैतिक अधिकार भी नहीं है। उत्तराखंड के श्रेष्ठ शिक्षक सरकारी विद्यालयों में भी अच्छी शिक्षा दे रहे हैं | हालाँकि उत्तराखण्ड की शिक्षा अभी भी बहुत सुधार चाहती है, लेकिन उसके लिए हमारे पास राज्य में ही श्रेष्ठ मॉडल उपलब्ध है |उत्तराखंड को अभी दिल्ली से नेताओं और उनके मॉडल आयात करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी |

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