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देहरादून में हुई लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में काम करने के तरीकों पर चर्चा

देहरादून।। लोकतंत्र के लिहाज से देहरादून में 17 दिसंबर का दिन बेहद खास रहा। क्योंकि यहां देशभर के सभी राज्यों से आए विधानसभाओं और विधान परिषदों को सचिव एक छत के नीचे नजर आए।  साथ ही लोकसभा महासचिव स्नेहता श्रीवास्तव और राज्यसभा के महासचिव देश दीपक वर्मा की मौजूदगी ने सचिवों को बैठक को और खास बना दिया। इस दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर लंबी चर्चा हुई। चर्चा के दौरान लोकसभा और राज्यसभा महासचिवों ने सदन की कार्यवाहियों से जुड़े अपने कई अनुभव साझा किए। लोकसभा महासचिव स्नेहलता श्रीवास्तव ने बताया कि किस तरह से नए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सदन की कार्रवाई को बेहतर बनाने के लिए नए आइडियाज पर काम कर रहे हैं।
स्नेहलता श्रीवास्तव ने कहा कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा की गई पहलों के कारण 17वीं लोक सभा के दो सत्र अत्यंत उत्पादक रहे हैं।  जिसमें सभा में मामलों को उठाने के लिए नए सदस्यों को ज्यादा से ज्यादा मौके दिए गए और लोकसभा द्वारा अनेक विधेयकों को पारित किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि लोकसभा स्पीकर के निर्देशों के मुताबिक सदस्यों की क्षमता के विकास के लिए सभा के समक्ष विचाराधीन विधेयकों पर संक्षिप्त जानकारी देने संबंधी 9 सत्रों का आयोजन किय गया था।  एक अन्य पहल के रूप में, सदस्यों को अपने विधायी और संसदीय कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता प्रदान करने के लिए एक सूचना और संचार केन्द्र की स्थापना की गई है।  इस केन्द्र के द्वारा एक महीने की संक्षिप्त अवधि के दौरान संसद सदस्यों को 6800 टेलिफोन कॉलें की गई।  ‘विधानमंडलों में सभा की कार्यवाही से शब्दों को हटाए जाने की प्रक्रिया की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता’ और ‘लोगों तक पहुंचने के लिए विधानमंडलों द्वारा नए उपाय किया जाना’ विषयों पर टिप्पणी करते हुए, श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा कि नई डिजिटल और सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकियों के उद्भव के कारण सभा की कार्यवाहियों से शब्दों को हटाए जाने की प्रक्रिया की तत्काल समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए राज्यसभा के महासचिव देश दीपक वर्मा ने कहा कि विधानमंडलों को सरकार और जनता के बीच मजबूत कड़ी के रूप में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए अपनी भूमिका की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने यह जानकारी दी कि संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित सभी 22 भाषाओं के लिए राज्यसभा में कंसल्टेंट इंटर्प्रेटर्स को पैनल में रखा गया है तथा जब और जैसे जरूरत हो, उनकी सेवाओं का लाभ लिया जाता है। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडु के निर्देशों के मुताबकि निरर्हता से संबंधित सभी मुद्दों का समाधान 3 महीने के भीतर कर दिया जाना चाहिए ताकि दल परिवर्तन संबंधी कानून का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके।
सम्मेलन में हिस्सा लेने देहरादून आए सभी महासचिवों और सचिवों का उत्तराखंड विधानसभा के सचिव जगदीश चंद्र की तरफ से स्वागत किया  गया। सचिवों के सम्मेलन में लोकसभा और राज्यसभा के साथ-साथ सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, पश्चिम बंगाल, नागालैंड, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, ओडिशा, राजस्थान और उत्तराखंड के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। ​
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