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घटनाक्रम : नवंबर माह की प्रमुख खबरें

गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा वापस, अब मिलेगी जेड प्लस सिक्योरिटी : आठ नवंबर

केंद्र सरकार ने गांधी परिवार को मिलने वाली एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया. इस निर्णय के लागू होने के बाद सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को अब एसपीजी के बजाय जेड प्लस सुरक्षा दी जाएगी.

बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय की एक उच्चस्तरीय बैठक में ये फैसला लिया गया है. गृह मंत्रालय अतिविशिष्ट लोगों को मिली सुरक्षा की समय-समय पर समीक्षा करता रहता है. मंत्रालय का मानना है कि फिलहाल गांधी परिवार को कोई खतरा नहीं है और ऐसे में उसके सदस्यों के लिए एसपीजी के बजाय जेड प्लस सुरक्षा पर्याप्त होगी.

कुछ समय पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा भी वापस ले ली गई थी. अब गृह मंत्रालय के ताजा फैसले का मतलब ये है कि देश में एसपीजी सुरक्षा सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास है.

अयोध्या पर आया फैसला : नौ नवंबर

देश की सबसे बड़ी अदालत ने राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद मालिकाना विवाद मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए विवादित जमीन का मालिकाना हक हिंदू पक्ष ने नाम कर दिया | साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में ही उचित स्थान पर पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय भी सुनाया. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से यह निर्णय सुनाया.

1045 पन्नों के निर्णय में पीठ ने भारतीय पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पुरात्व विभाग ने विवादित स्थल के नीचे मंदिर होने के सबूत पेश किए हैं. हालांकि पीठ ने कहा कि यह साबित नहीं किया जा सका कि मस्जिद का निर्माण मंदिर गिरा कर किया गया था.

इस निर्णय में पीठ ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने को गलत भी करार दिया। इस फैसले के बाद सत्तर वर्षों से चले आ रहे सबसे विवादित मामले का पटाक्षेप होने की उम्मीद है. सुप्रीम कोर्ट ने लगातार 40 दिन तक चली सुनवाई के बाद पिछले महीने 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

चीफ जस्टिस का दफ्तर भी आरटीआई के दायरे में – सुप्रीम कोर्ट 13 नवंबर

एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के दायरे में आता है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने ये फैसला सुनाया. पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी की अपील खारिज कर दी.

शीर्ष अदालत ने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में जज कानून से ऊपर नहीं हो सकते. उसका ये भी कहना था कि जवाबदेही को पारदर्शिता से अलग करके नहीं देखा जा सकता. संविधान पीठ ने आगाह किया कि आरटीआई कानून का इस्तेमाल निगरानी रखने के हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता. पीठ का ये भी कहना था कि पारदर्शिता के मुद्दे पर विचार करते समय न्यायपालिका की स्वतंत्रता को ध्यान में रखा जाना चाहिए.

 जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े बने नए मुख्य न्यायाधीश : 18 नवंबर

जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े ने देश के 47 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाल लिया. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें 18 नवंबर को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई | जस्टिस बोबड़े का कार्यकाल लगभग 18 महीने का होगा. जस्टिस बोबडे अयोध्या रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद जमीनी विवाद मामले में फैसला देने वाले पांच जजों के संविधान पीठ में शामिल रहे.

जस्टिस बोबड़े ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में वकालत से कैरियर शुरू किया. वर्ष 2000 में वे बॉम्बे हाई कोर्ट में एडिशनल जज नियुक्त हुए. वर्ष 2012 में वे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने. अगले ही वर्ष 2013 में उन्हें उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश बनाया गया. जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े के पूर्ववर्ती जस्टिस गांगुली नवंबर को रिटायर हुए.

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