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किसानों के अनशन, देशभर में प्रदर्शन के बीच फिर वार्ता की तैयारी में सरकार

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर 19 दिनों से जारी किसान आंदोलन ने सोमवार को देशव्यापी रूप ले लिया। वहीं सरकार ने किसानों के मनाने के लिए अगले दौर की बैठक की तैयारियों के संकेत दिए। कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि 10 और संगठन सरकार के साथ आ गए हैं। हम कृषि कानूनों की हर धारा पर बात करने को तैयार हैं। जल्दी ही बैठकर बातचीत की अगली तारीख तय की जाएगी।

नरेंद्र तोमर ने किसानों को मनाने की रणनीति बनाने के लिए सोमवार को फिर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। शाह के घर पर दोनों मंत्रियों के बीच आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। तोमर ने कहा कि सरकार किसी भी वक्त किसानों से बात करने के लिए तैयार है।
तोमर ने कहा कि किसानों के साथ वार्ता की अगली तारीख तय करने के लिए सरकार उनसे संपर्क में है। बैठक निश्चित रूप से होगी। हम किसानों के साथ संपर्क में हैं। सरकार किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार है। किसान नेताओं को तय करके बताना है कि वे अगली बैठक के लिए कब तैयार हैं।
एमएसपी पर गुमराह कर रही सरकार- चढ़ूनी
वहीं, टिकरी बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि सरकार एमएसपी के नाम पर गुमराह कर रही है। भाजपा हर जगह कह रही है कि एमएसपी दिया जाएगा। सरकार के मंत्री भी यही दोहरा रहे हैं। जबकि गृहमंत्री अमित शाह ने 8 दिसंबर की बैठक में साफ कहा था कि सरकार सभी 23 फसलों को एमएसपी पर नहीं खरीद सकती क्यों इसमें 17 लाख करोड़ का खर्च आता है।

किसानों की राजनाथ से मुलाकात
इस बीच आगे की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग समूहों ने तोमर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। प्रदर्शनकारी किसानों की 40 यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ सरकार की बातचीत की अगुवाई तोमर कर रहे हैं। इसमें उनके साथ केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग व खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री सोम प्रकाश शामिल हैं।

केंद्र और किसान नेताओं के बीच अब तक हुई पांच दौर की वार्ताएं बेनतीजा रही हैं। किसान संगठनों ने दावा किया कि देशभर में अनेक जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन भी आयोजित किए गए।

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने अनशन में नहीं लिया हिस्सा
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां नेताओं ने अनशन में हिस्सा नहीं लिया। इसी संगठन ने जेल में बंद कैदियों की रिहाई की मांग की थी और इसके वायरल होने पर कहा था कि किसान आंदोलन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व  माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। संगठन के पंजाब के महासचिव सुखदेव सिंह ने कहा कि हमें बदनाम किया गया। किसान संगठनों ने भी हमें गलत समझा, हमने सिर्फ मानवाधिकारों के तहत कैदियों की रिहाई का मुद्दा उठाया था।

 

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