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उत्तराखंड में सामने आया कोरोना वायरस का पहला मामला, ट्रेनी आईएफएस अधिकारी में हुई पुष्टि

उत्तराखंड में कोरोना वायरस से संक्रमण का पहला मामला सामने आया है. देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अनुसंधान के एक प्रशिक्षु आईएफएस में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है. ये प्रशिक्षु आईएफएस  कुछ दिन पहले एक दल के साथ विदेश यात्रा से लौटे हैं. पीड़ित को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सीएमओ  डाक्टर मीनाक्षी जोशी ने रविवार को ट्रेनी आईएफएस को कोरोना वायरस संक्रमण होने की पुष्टि की. प्रशिक्षु एईएफएस को कोरोना संक्रमण होने की खबर के बाद वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में आम जनता के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. संस्थान के निदेशक अरुण सिंह रावत ने बताया कि परिसर में आम लोगों की आवाजाही एहतियातन बंद की गई है.

प्रदेश में चार ट्रेनी आईएफएस समेत 25 लोगों के सैंपल जांच के लिए हल्द्वानी स्थित डाक्टर सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कालेज की लैब में भेजे गए थे, जिनमें अभी तक 18 की रिपोर्ट आ चुकी है. इसमें 17 लोगों के सैंपल नेगेटिव आए जबकि एक सैंपल पाजिटिव पाया गया. सात लोगों की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है. गौरलतब है कि वन अनुसंधान अकादमी के 62 ट्रेनी आईएफएस पिछले दिनों विभिन्न देशों से ट्रेनिंग टूर से लौटे थे. स्वदेश वापसी के बाद सभी की स्क्रीनिंग कराई गई थी, जिसके बाद बीते शुक्रवार (13 मार्च) को चार ट्रेनी आईएफएस के सैंपल जांच के लिए भेजे थे. इसमें से एक ट्रेनी में आज कोरोना की पुष्टि हुई है.

वैश्विक महामारी गोषित हो चुके कोरोना वायरस को उत्तराखंड में भी महामारी घोषित किया जा चुका है. राज्य सरकार ने बीते रोज प्रदेश में उत्तराखंड महामारी रोग अधिनियम (कोविड-19) में लागू कर दिया है, जिसके बाद स्वास्थ्य सचिव, सभी जिलों के जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को वायरस की रोकथाम के लिए कदम उठाने के संबंध में असीमित अधिकार दे दिए गए हैं. महामारी घोषित किए जाने के बाद प्रदेश में आगामी 31 मार्च तक सभी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, कालेज, सिनेमाघर और मल्टीप्लेक्स बंद रहेंगे. प्रदेश सरकार ने आइसोलेशन वार्ड के लिए 50 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है.

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