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शीतकालीन यात्रा के लिए पर्यटक स्थलों का प्रचार-प्रसार करेगी सरकार

देहरादूनः पहाड़ी और खूबसूरत प्रदेश उत्तराखंड में शीतकाल में यात्रा के लिए सैलानियों को लुभाने को प्रदेश सरकार तैयारी कर रही है। चारधाम के शीतकालीन गद्दी स्थलों के साथ ही औली समेत अन्य महत्वपूर्ण पर्यटक स्थलों को लेकर देशभर में प्रचार-प्रसार की कार्य योजना का खाका खींचा जा रहा है। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं और सैलानियों से शीतकाल में उत्तराखंड आने की अपील की जाएगी। राज्य में आने पर सैलानियों को दिक्कतें न हों, इसके लिए संबंधित स्थलों में सुविधाएं विकसित करने पर भी फोकस किया जा रहा है।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के अनुसार शीतकाल में भी श्रद्धालुओं व पर्यटकों का राज्य में प्रवाह निंरतर बना रहे, इस पर फोकस किया गया है। इसी कड़ी में चारधाम के शीतकालीन गद्दीस्थलों के साथ ही पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों के बारे में देशभर में प्रचार-प्रसार की कार्ययोजना बनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इन स्थलों में आने वाले सैलानियों, श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो, इसके लिए व्यवस्थाएं जुटाई जा रही हैं। इन स्थलों की धारण क्षमता के हिसाब से व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।

कोरोना संकट के चलते इस मर्तबा राज्य का पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद चारधाम यात्रा के दरवाजे श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। साथ ही राज्य में आने वाले सैलानियों को कोरोना जांच रिपोर्ट की बाध्यता से छूट दी गई। इसके बेहतर नतीजे भी आए और चारधाम समेत पर्यटक स्थलों पर लोग उमड़े भी, लेकिन अब चारधाम के कपाट बंद हो चुके हैं। ऐसे में पर्यटन का दारोमदार प्रमुख पर्यटक स्थलों तक ही सीमित होकर रह गया है।

सामान्य परिस्थितियों में उत्तराखंड में प्रति वर्ष लगभग साढ़े तीन करोड़ सैलानी आते हैं। इनमें 44 फीसद भागीदारी चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री आने वाले श्रद्धालुओं की रहती है। ऐेसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य की आर्थिकी में पर्यटन का कितना बड़ा योगदान है। इस बार कोरोना संकट से पर्यटन उद्योग पर पड़े असर को देखते हुए इसे पटरी पर लाने की कवायद तो चल ही रही है।

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