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उत्तराखंड : गांवों को बनाया जाएगा ‘संस्कृत ग्राम’

उत्तराखंड में बीजेपी सरकारें संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए तमाम निर्णय लेती रही है। इसी कड़ी में अब उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धनसिंह रावत ने संस्कृत गांव बनाए जाने का निर्णय लिया है। इसके तहत धन सिंह अपनी विधानसभा श्रीनगर से इसकी शुरूआत करेंगे।

संस्कृत भारत की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है, जिसका प्रमाण भारत के चारों वेदों को माना जा सकता है, क्योंकि ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद संस्कृत भाषा में ही लिखे गए हैं।

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धनसिंह रावत ने बताया कि विधानसभा में 4 ब्लॉक है और मॉडल के रूप में हर ब्लॉक के एक-एक गांव में संस्कृत गांव घोषित किए जाएंगे। धन सिंह ने दावा किया है कि आने वाले 6 महीने में इन गांव के बुजुर्ग और बच्चे संस्कृत में बात करते हुए नजर आएंगे।

आपको बता दें कि, पूर्व में बीजेपी शासित सरकार ने ही उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया था। इसके बाद मंत्रियों और विभागों के नामों को संस्कृत में भी लिखे जाने का निर्णय लिया गया था।

उत्तराखंड के लोग मुख्य रूप से चार भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें हिंदी, कुमाउनी, गढ़वाली और जौनसारी शामिल हैं।

यहां गढ़वाली 23.03% लोग, कुमाउनी 19.94% और जौनसारी 1.35% लोग बोलते हैं जबकि हिंदी बोलने वाले लोगों का प्रतिशत 45% है।

उत्तराखंड में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए भाजपा सरकार कई फैसले लेते रही है। लेकिन ये पहला मौका है, जब आम लोगों को भी संस्कृत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। ऐसे में देखने वाली ये होगी कि ये प्रयास कितना सफल हो पाता है।

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