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ये है उत्तराखंड का फेमस हैंडीक्राफ्ट विलेज

नैनीताल जिले का गेठिया एक ऐसा गांव बन चुका है जिसे अब उत्तराखंड का हैंडीक्राफ्ट विलेज यानी हस्तशिल्प गांव कहा जाने लगा है। खास बात ये है कि विदेशों में भी गांव की पहचान अपने काम से होने लगी है। गांव को यह पहचान दिलाने में एक एनजीओ की 6 साल की मेहनत ही रंग लाई। कर्तव्य कर्मा नामक एनजीओ के गौरव बताते हैं कि उन्होंने साल 2014 में महिलाओं के हुनर को भांपकर यहां पर कपड़े की ज्वैलरी बनाने का काम शुरु किया था। धीरे-धीरे इस काम ने ऐसी सुर्खियां बटोरीं कि महिलाओं के नाम और उनके काम के साथ-साथ गांव का भी नाम रौशन होने लगा। और देखते ही देखते गांव की पहचान उत्तराखंड के हस्तशिल्प गांव के रूप में विश्व पटल पर हो गई।

फैबरिक ज्वैलरी है गेठिया की पहचान

तल्ला गेठिया गांव की पहचान फैबरिक ज्वैलरी बनाने वाले गांव के तौर पर बन चुकी है। कपड़े की ज्वैलरी हो या फिर राम झोला, कुशन कवर्स, कोस्टर्स, जूट बैग्स हों या फिर छोटे पर्स और पाउच, ये सभी प्रोडेक्ट बिल्कुल नए तरीके के हैं। नैनीताल या उसके आस-पास घूमने आने वाले लोगों को जब ये पता चलता है कि यहीं पास में तल्ला गेठिया गांव में कपड़े की खूबसूरत ज्वैलरी बनाने का काम होता है तो लोग दौड़े चले आते हैं। गांव में इस काम से जुड़कर लगभग 50 महिलाएँ आत्मनिर्भर हो चुकी है।

एनजीओ कर्तव्य कर्मा का बढ़ता दायरा

कर्तव्य कर्मा एनजीओ की मुहिम सिर्फ हैंडीक्राफ्ट तक ही सीमित नहीं है। संस्था के दो और जगह सेंटर्स हैं जहां पर एग्रो प्रोडक्ट्स और हैंड निटिड प्रोडक्ट्स पर काम चल रहा है। फिलहाल हैंडीक्राफ्ट के साथ साथ संस्था ने धीरे धीरे एग्रो प्रोडक्ट्स पर भी काम करना शुरु कर दिया है। यहां पर हाथ से कूटे हुए मसाले, दालें, शहद, हर्बल चाय और हर्ब्स सीज़निंग का काम किया जा रहा है। एग्रो प्रोजेक्ट पर फिलहाल 14 महिलाएं काम कर रही हैं। इसके अलावा गांव में एक छोटा सा निटिंग सेंटर भी है जहां पर महिलाएं हाथ से स्वेटर, कार्डिगन, शॉल, बच्चों के स्वेटर, टोपी, दस्ताने और मफलर बनाने का काम करती हैं। बुनाई के काम को 8 महिलाएं अंजाम देती हैं। बुनाई के सभी प्रोडक्ट को फिलहाल बाज़ार में उतारा जा चुका है।

ग्रामीण महिलाओं खुद ही करती है अपने प्रोडक्ट की मॉडलिंग

कर्तव्य कर्मा संस्था ने महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे पहाड़ी हाट के प्रोडक्ट को महिला सशक्तिकरण का मज़बूत आधार माना है। काम को पहचान मिलने के साथ ही गांव की पहचान भी होने लगी लेकिन इन हुनरमंद महिलाओं की खुद की पहचान अब तक नहीं बनी जिनके उत्थान का मकसद लेकर कर्तव्य कर्मा संस्था ने काम शुरु किया था। गांव में बनने वाले प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए इन्हीं महिलाओं को मॉडल के तौर पर आगे किया गया। यानी कान के झुमके और गले का हार पहनकर ये महिलाएं खुद ही अपने प्रोडक्ट की ब्रैंड एम्बैसेडर बन गईं।

बॉलिवुड तक पहुंची पहचान

कर्तव्य कर्मा की महिलाओं का काम ऐसा है जिसके चर्चे बॉलिवुड के स्टार एक्टर्स भी करते हैं। तल्ला गेठिया गांव में बन रही कपड़े की ज्वैलरी फिल्म एक्टर वरुण धवन को भी लुभा गई थी। जब वरुण धवन और अनुष्का शर्मा की फिल्म सुई-धागा रिलीज़ हुई थी जिसमें एक वरुण धवन और अनुष्का शर्मा के संघर्ष की कहानी को पर्दे पर उतारा गया था। फिल्म में दोनों एक्टर्स ने अपने काम को अपनी पहचान बनाते हुए दुनिया भर में अपना परचम लहराया था। इसी सपने को तल्ला गेठिया गांव की महिलाएं भी साकार करने में जुटी हैं। जब यह बात ट्विटर के ज़रिए वरुण धवन को बताई गई कि गांव की कहानी भी आपकी फिल्म सुई-धागे से मिलती है तो उन्होंने ना सिर्फ गांव को बधाई दी बल्कि ट्विटर पर टैग करके लिखा कि मैं उम्मीद करता हूं कि आपकी कहानी के पात्र भी फिल्म सुई-धागे की कहानी से ज़रुर मेल खाएंगे और आप सफलता की उंचाइयों को छुएगें। वरुण धवन के इस ट्वीट ने तो कर्तव्य कर्मा संस्था और गांव की पहचान को बॉलिवुड तक पहुंचा दिया और देखते ही देखते गांव की एक अलग ही पहचान विश्व पटल पर उभरने लगी।

(Satyavoice.com के लिए कुलदीप तोमर की रिपोर्ट)

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