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उत्तराखंड में हर्बल खेती ने किया 40 हजार किसानों का उद्धार, हुआ 120 करोड़ का कारोबार

उत्तराखंड के किसान इन दिनों परंपरागत खेती से आगे बढ़कर हर्बल खेती का रुख कर रहे हैं, जिसके चलते प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। अब राज्य सरकार भी जड़ी-बूटी की खेती करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जड़ी-बूटी की खेती ने इस समय जोर पकड़ा हुआ है जिससे अब तक 120 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार हो गया है।  साथ ही सरकार का मानना है कि वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिहाज से परंपरागत खेती में बदलाव की बहुत जरूरत है।

राज्य कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि सगंध और जड़ी-बूटी की खेती को बढ़ावा देने के साथ सरकार मार्केटिंग का प्रावधान कर रही है। पारंपरिक फसलों की खेती को बंदर और जंगली जानवरों के नुकसान पहुंचाने से किसानों को आर्थिक नुकसान होता है। इस समस्या का सबसे अच्छा विकल्प सगंध व हर्बल खेती का है।

उनियाल के अनुसार, प्रदेश में सगंध पौध और जड़ी-बूटी की खेती करने के लिए अनुकूल वातावरण है। लंबे समय से इस दिशा में पहल की जा रही है। इसके बावजूद भी संभावनाओं के सापेक्ष सगंध और जड़ी-बूटी के उत्पादन को व्यावसायिक स्वरूप नहीं मिला है। प्रदेश में लघु और सीमांत किसानों की संख्या करीब 10 लाख है। वर्तमान में 40 हजार किसानों ने हर्बल खेती को अपनाया है।

जड़ी-बूटी उद्योग को बढ़ावा देने के मद्देनजर सरकार ने लघु एवं मध्यम उद्योग नीति में नए प्रावधान लाने का फैसला किया है, जिसके अनुसार संगध और जड़ी-बूती फसलों की खेती करने वाले किसानों को विशेष वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।

यहां बताना जरूरी है कि हाल के वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी हर्बल दवाइयों की मांग में खासा इजाफा देखा गया है और एशियाई, खासकर हिमालय से जुड़े, देश इसके प्रमुख निर्यात साबित हो सकते हैं। इन्हीं संभावनाओं ने सरकार और किसानों को इस ओर आकर्षित किया है।

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