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रेल भूमि अतिक्रमण मामले में स्टेट अफसर और डीआरएम को हाईकोर्ट का नोटिस

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गफूर बस्ती हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर जमे अतिक्रमणकारियों के मामलों का निस्तारण अब तक नहीं करने को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर के स्टेट अफसर विवेक कुमार सिंह व डीआरएम आशुतोष पंत को अवमानना नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देेश दिए हैं।

गौलापार हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी ने 2013 में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि अवैध खनन की वजह से गौला पुल को खतरा पैदा हो गया है। इसी याचिका में सुनवाई के दौरान तथ्य आया कि रेलवे स्टेशन हल्द्वानी से सटी गफूर बस्ती में रेलवे की भूमि में अतिक्रमण किया गया है। साथ ही अवैध खनन कर यहां एकत्र भी किया जा रहा है। नौ नवंबर 2016 को हाई कोर्ट ने गफूर बस्ती से अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया था। इसके बाद अतिक्रमणकारियोंने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए याचिकाकर्ताओं को नोटिस देकर उनका पक्ष सुनने के निर्देश रेलवे को दिए थे।
पिछले साल याचिकाकर्ता ने फिर से कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि रेलवे द्वारा मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। कोर्ट ने रेलवे के स्टेट अफसर से 31 मार्च 2020 तक अतिक्रमणकारियों के लंबित 4465 वादों के निस्तारण के निर्देश दिए थे। इसी बीच याचिकाकर्ता ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी जुटाई, जिसमें रेलवे की ओर से मार्च से कोरोना लाकडाउन का हवाला देते हुए बताया गया कि करीब चार सौ प्रार्थना पत्रों का निस्तारण अंतिम चरण में है। इसके बाद रविशंकर ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। गुरुवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद स्टेट रेलवे अफसर व डीआरएम बरेली को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।

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