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बिन थाली हाथ में मिड-डे मील खाने को मजबूर उत्तराखंड के ये ढाई लाख स्टूडेंट

देहरादून।। केंद्र ने उत्तराखंड को मिड-डे मील योजना के लिए 41.36 करोड़ का बजट मुहैया कराया है। सभी स्कूल ये योजना चलाने का दावा भी करते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। हालात यह हैं कि राज्य में करीब 2.5 लाख स्कूली बच्चों को खाने के लिए थाली और गिलास मिले ही नहीं । इसके अलावा एलपीजी कनेक्शन के अभाव में खाना बनाने वाली भोजन माताएं धुएं में अपनी जिंदगी धूमिल कर रही हैं।

न थाली न खाना बनाने के लिए गैस

वास्तव में प्रदेश के 5,595 विद्यालयों में न तो एलपीजी कनेक्शन है और न ही गैस स्टोव है। इतना ही नहीं, करीब ढाई लाख विद्यार्थियों को मिड-डे मील के लिए न तो थाली मिल पाई है और न गिलास मिले हैं।

इधर केंद्र सरकार से मिड डे मील योजना के तहत राज्य सरकार को 41.36 करोड़ की धनराशि मुहैया करा दी है। अब राज्य सरकार का कहना है कि इस राशि से मिड-डे मील को बनाने का खर्च, भोजन माताओं को मानदेय व अन्य खर्चों की पूर्ति की जाएगी। भोजन पकाने के लिए विद्यालयों को बर्तन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

अब हो रहा है कमियां दूर करने का दावा

राज्य सरकार के मुताबिक अगले वित्तीय वर्ष 2020-21 तक उक्त खामियों को दुरुस्त किया जाएगा। आपको बता दें कि प्रदेश में 17,042 विद्यालयों में मिड-डे मील योजना से चलाई जा रही है। इनमें से सिर्फ 11,447 विद्यालयों को ही एलपीजी कनेक्शन व गैस स्टोव उपलब्ध कराए जा सके हैं। वहीं मिड डे मील से लाभान्वित होने वाले कक्षा एक से आठवीं तक कुल 6.84 लाख बच्चों में से अभी तक करीब 4.50 लाख बच्चों के लिए ही थाली और गिलास का बंदोबस्त हो पाया है।

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