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जिस दवा के लिए तड़प रहे हैं ट्रंप, उत्तराखंड में बनती है वो दवा

सत्यजीत पंवार 

चीन से शुरू हुई कोरोना महामारी से पूरी दुनिया थर्रा रही है। हर जिंदा शख्स को अपनी मौत का खौफ सता रहा है। हालात ऐसे हैं कि अपने लोगों को मरता देख दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका मजबूर है। और भारत के सामने गिड़गिड़ा रहा है। अमेरिका भारत से मलेरिया की दवा मांग रहा है। ऐसे में आपको जानकर ताज्जुब होगा कि दुनिया की महाशक्ति को जिस दवा की जरूरत है वो भारत में  कहां बनती है?

देवभूमि उत्तराखंड में बनती है दवा! 

कोरोना महामारी ने अमेरिका जैसी सुपर पावर को कमर तोड़ कर रख दी है। अमेरिका मदद के लिए भारत की राह देख रहा है। जिस दवा से अमेरिका इस वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन तैयार करना चाहता है। वह दवा उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी (Capital) देहरादून (Dehradun) में बनती है। इस दवा को फॉर्मा कंपनी इप्का लैब (Ipca Laboratories) बनाती है। इस दवा का नाम है हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) और कोलोगिन फॉस्फेक्ट लेरियागो टैबलेट। इस दवा का प्रोडक्शन भारी मात्रा में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सिडकुल-सेलाकुई में और सिक्किम प्लांट में हो रहा है। लेकिन यह जानकर आपको हैरानी होगी कि कभी इस कपंनी के मालिक अमिताभ बच्चन थे।

अमिताभ ने 1975 में इस फॉर्मा कंपनी का टेकओवर किया था, लेकिन बाद में सदी के महानायक कंपनी से बाहर निकल गए। अमिताभ बच्चन ने भाई अजिताभ बच्चन और पत्नी जया बच्चन के साथ मिलकर इप्का लैब (Ipca Laboratories) को टेकओवर किया। अमिताभ, अजिताभ और जया के इस कंपनी में 36 प्रतिशत शेयर थे। बाकी 18 फीसदी हिस्सेदारी एमआर चंदूरकर और प्रेमचंद गोढा के पास थी।
इसके बाद बाॅलीवुड शहंशाह अमिताभ, भाई अजिताभ और पत्नी जया बच्चन इप्का के बोर्ड में शामिल हो गए। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एमआर चंदूरकर और प्रेमचंद गोढा भी शामिल थे।

वर्ष 1975 में जब अमिताभ बच्चन ने इस कंपनी का टेकओवर किया था, उस समय इपका लैब (Ipca Laboratories) का कुल टर्नओवर सिर्फ 54 लाख रुपए था। साल 1997 में अभिताभ, अजिताभ और जया ने अपनी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया। बताया जाता है कि अभिताभ, अजिताभ और जया को हिस्सेदारी बेचने के बदले 80 करोड़ रुपए मिले थे।

IPCA Laboratories की शुरुआत
इप्का लैब की 1949 में दो मेडिकल प्रोफेशनल्स केबी मेहला और डॉ. एनएस टिबरेवाला ने मिलकर शुरुआत की थी। यह कंपनी एक ग्लोबल फॉर्मास्युटिकल कंपनी बन चुकी है। इस कंपनी में हजारों कर्मचारी काम करते हैं। 2018-2019 में कंपनी की कुल कमाई थी 3687 करोड़ रुपए। वर्तमान में कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में प्रेमचंद गोढा, अजीज कुमार जैन, प्रणय गोढ़ा, प्रशांत गोढ़ा, आनंद टी कुसरे, देव प्रकाश यादवा, मनीषा प्रेमनाथ और कमल किशोर सेठ शामिल हैं।

 

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