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झारखंड विधानसभा चुनाव : डगर नहीं आसान

पिछले चुनाव का अंकगणित

पिछले चुनाव में भाजपा ने 37 और आजसू ने पांच सीटों पर जीत हासिल कर रघुबर दास के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। विपक्षी दलों की बात करें तो पिछले विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा को 19, झारखंड विकास पार्टी को आठ और कांग्रेस को छह सीटें मिली थी। छह सीटों पर अन्य ने जीत दर्ज की थी। झारखंड विकास पार्टी के छह विधायक बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे। वोट प्रतिशत की बात करें तो भाजपा को सबसे ज्यादा 31.8 प्रतिशत मत मिले थे। झारखंड मुक्तिमोर्चा को 20.8 और कांग्रेस को 10.6 प्रतिशत वोट मिले थे। झारखंड विकास पार्टी को 10.2 प्रतिशत वोट तथा सरकार में सहयोगी आजसू को 3.7 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे।  अन्य दलों तथा निर्दलीयों को 22.9 प्रतिशत वोट मिले थे।

भाजपा के लिए चुनौती

झारखंड विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती सत्ताधारी भाजपा के सामने है। राज्य में पांच साल तक स्थिर सरकार देने और लोकसभा में 14 में से 11 सीटें पाने वाली भारतीय जनता पार्टी पर इस बार झारखंड में अपना जलवा बरकरार रखने का भरपूर दबाव है। वैसे झारखंड के अब तक के चुनावी इतिहास पर गौर करें तो राज्य का रिकार्ड इस मामले में बेहद खराब रहा है। वर्ष 2000 में राज्य गठन से अब तक कुल 19 सालों के दौरान 10 बार मुख्यमंत्री बदले और तीन बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है। इसके पीछे मुख्य वजह किसी भी पार्टी को स्पष्ट जनादेश नहीं मिल पाना रहा है।

इस बार भाजपा ने ‘अबकी बार 65 पार’ का लक्ष्य रखा है, लेकिन झारखंड का अब तक का चुनावी इतिहास इसके उलट रहा है। यहां हर बार सत्ता बदलने की रवायत रही है। भाजपा के लिए इस बार डगर इस लिए भी कठिन बताई जा रही है क्योंकि एनडीए गठबंधन के महत्वपूर्ण साथी रहे नीतिश कुमार की जेडीयू,  सुदेश महतो की आजसू और रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा ने सीटों पर सहमति न बन पाने के कारण गठबंधन से किनारा कर लिया है। ऐसे में सभी 81 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी अकेले चुनाव लड़ रही है। हाल ही में संपन्न हुए महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद तमाम जानकारों ने झारखंड में भी कड़ा मुकाबला होने की भविष्यवाणी कर दी है। महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा को अपेक्षा के अनुरूप सीटें नहीं मिली। दोनों ही राज्यों में भाजपा प्रचंड जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थी मगर ऐसा नहीं हो सका। दोनों ही राज्यों में पार्टी बहुमत से दूर रह गई।

ऐसे में भाजपा झारखंड में किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहेगी। दूसरी तरफ हरियाणा में उम्मीद से कई गुना अधिक सीटें जीतने के बाद कांग्रेस पार्टी को संजीवनी मिल गई है। ऐसे में कांग्रेस झारखंड में पूरा जोर लगा कर अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए बेकरार है। झारखंड में वापसी के लिए कांग्रेस इस कदर बेकरार है कि पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ गठबंधन करते हुए कम सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार है। भारतीय जनता पार्टी के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली झारखंड विकास पार्टी भी बड़ी चुनौती है। पहले भाजपाई रहे मरांडी ने खुद की उपेक्षा के बाद नई पार्टी बना ली थी। बाबूलाल मरांडी की मजबूत जनाधार वाली छवि के बावजूद पिछले विधानसभा चुनाव में झारखंड विकास पार्टी को केवल आठ सीटें ही मिली थी। इस बार पार्टी ने पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखा है। ऐसे में भाजपा के सामने दोहरी चुनौती है।

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