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जानिए कहां है अंग्रेजों की बसाई हुई लोकप्रिय पर्यटन स्थल ‘पहाड़ों की रानी’

देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में कई पर्यटक स्थल हैं। अंग्रेजों द्वारा बसाई गई पहाड़ों की रानी पर्यटक स्थल मसूरी का दीदार करने के लिए लोग लाखों की संख्या में पहुंचते हैं। वैसे तो मसूरी पूरे 12 महीने खुला रहता है, लेकिन गर्मियों में यहां पर्यटकों की आमद ज्यादा होती है। वर्ष 2020 में कोविड का खतरा होने के बाद भी यहां के होटल और बाजारों में रौनक रही।

आपको बता दें कि पहाड़ी प्रदेश उत्तराखण्ड के मसूरी शहर को पर्वतों की रानी भी कहा जाता है। राज्य की अस्थायी राजधानी देहरादून से 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मसूरी उन स्थानों में से एक है जहां पर्यटक एक बार आने के बाद बार-बार आना चाहते हैं। यह पर्वतीय पर्यटन स्थल हिमालय पर्वतमाला के मध्य हिमालय श्रेणी में पड़ता है। दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और यहां तक कि हिमाचल के निवासियों के लिए भी यह लोकप्रिय ग्रीष्मकालीन पर्यटन स्थल है। मसूरी अंग्रेजों द्वारा बसाये गये अन्य नगरों की भांति ही दिखता है। मसूरी में घूमना भी आपको पसंद आयेगा और अपने होटल के कमरे से मसूरी को निहारते रहने का भी एक अलग आनंद है। मसूरी के प्रमुख पर्यटक स्थल इस प्रकार हैं-

कैम्पटी फाल
यमुनोत्री रोड पर मसूरी से 12 किलोमीटर दूर 4500 फुट की ऊंचाई पर यह इस सुंदर घाटी में स्थित सबसे बड़ा और सबसे खूबसूरत झरना है, जो चारों ओर से ऊंचे पहाड़ों से घिरा है। झरने की तलहटी में स्नान तरोताजा कर देता है और बच्चों के साथ-साथ बड़े भी इसका आनंद उठाते हैं। मसूरी-यमुनोत्री मार्ग पर नगर से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना पांच अलग-अलग धाराओं में बहता है, जो पर्यटकों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र बना रहता है। यह स्थल समुद्रतल से लगभग 4500 फुट की ऊंचाई पर है। इसके चारों ओर पर्वत श्रृंखलाएं दिखाई देती हैं। अंग्रेज अपनी चाय दावत अकसर यहीं पर किया करते थे, इसीलिए तो इस झरने का नाम कैंपटी (कैंप़टी) फाल है। यमुनोत्री के रास्ते में 1370 मीटर की ऊंचाई पर कैम्प्टी जलप्रपात स्थित है। मसूरी से इसकी दूरी 12 किलोमीटर है। यह मसूरी घाटी का सबसे सुंदर जलप्रपात है।

गन हिल
मसूरी की दूसरी सबसे ऊॅंची चोटी पर रोप-वे द्वारा और पैदल रास्ते से भी पहुंचा जा सकता है, यह रास्ता माल रोड पर कचहरी के निकट से जाता है। गन हिल से हिमालय पर्वत श्रृंखला अर्थात् बंदरपंच, श्रीकांता, पिठवाड़ा और गंगोत्री समूह आदि के सुंदर दृश्य देखे जा सकते हैं, साथ ही मसूरी और दून-घाटी का विहंगम दृश्य भी यहां से देखे जा सकते हैं। बताया जाता है कि आजादी-पूर्व के वर्षों में इस पहाड़ी के ऊपर रखी तोप प्रतिदिन दोपहर को चलाई जाती थी ताकि लोग अपनी घड़ियां सैट कर लें। इसी कारण इस स्थान का नाम गन हिल पड़ा।

म्युनिसिपल गार्डन
मसूरी का वर्तमान कंपनी गार्डन या म्युनिसिपल गार्डन आजादी से पहले तक बोटेनिकल गार्डन भी कहलाता था। कंपनी गार्डन के निर्माता विश्वविख्यात भूवैज्ञानिक डॉ. एच. फाकनार लोगी थे। सन्‌ 1842 के आसपास उन्होंने इस क्षेत्र को सुंदर उद्यान में बदल दिया था। बाद में इसकी देखभाल कंपनी प्रशासन करने लगा था। इसलिए इसे कंपनी गार्डन या म्युनिसिपल गार्डन कहा जाने लगा।

कैमल बैक रोड
कुल 3 किलोमीटर लंबा यह रोड रिंक हॉल के समीप कुलरी बाजार से आरंभ होता है और लाइब्रेरी बाजार पर जाकर समाप्त होता है। इस सड़क पर पैदल चलना या घुड़सवारी करना अच्छा लगता है। हिमालय में सूर्यास्त का दृश्य यहां से सुंदर दिखाई पड़ता है। मसूरी पब्लिक स्कूल से कैमल रॉक जीते जागते ऊंट जैसी लगती है।

भट्टा फाल
यह फाल मसूरी-देहरादून रोड पर मसूरी से 7 किलोमीटर की दूर पर स्थित है। पर्यटक बस या कार द्वारा यहां पहुंचकर आगे की 3 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके झरने तक पहुंच सकते हैं। स्नान और पिकनिक के लिए यह अच्छी जगह है।

नाग देवता मंदिर
कार्ट मेकेंजी रोड पर स्थित यह प्राचीन मंदिर मसूरी से लगभग 6 किलोमीटर दूर है। वाहन ठीक मंदिर तक जा सकते हैं। यहां से मसूरी के साथ-साथ दून-घाटी का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।

मसूरी झील
मसूरी-देहरादून रोड पर यह नया विकसित किया गया पिकनिक स्पॉट है, जो मसूरी से लगभग 6 किलोमीटर दूर है। यह एक आकर्षक स्थान है। यहां पैडल-बोट उपलब्ध रहती हैं। यहां से दून-घाटी और आसपास के गांवों का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।

ज्वालाजी मंदिर (बेनोग हिल)
मसूरी से 9 किलोमीटर पश्चिम में 2104 मी. की ऊंचाई पर ज्वालाजी मंदिर स्थित है। यह बेनोग हिल की चोटी पर बना है, जहां माता दुर्गा की पूजा होती है। मंदिर के चारों ओर घना जंगल है, जहां से हिमालय की चोटियों, दून घाटी और यमुना घाटी के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं।

तिब्बती मंदिर
बौद्ध सभ्यता की गाथा कहता यह मंदिर निश्चय ही पर्यटकों का मन मोह लेता है। इस मंदिर के पीछे की तरफ कुछ ड्रम लगे हुए हैं। जिनके बारे में मान्यता है कि इन्हें घुमाने से मनोकामना पूरी होती है।

चाइल्डर्स लॉज
लाल टिब्बा के निकट यह मसूरी की सबसे ऊंची चोटी है। टूरिस्ट कार्यालय से यह 5 किलोमीटर दूर है, यहां तक घोड़े पर या पैदल भी पहुंचा जा सकता है। यहां से बर्फ के दृश्य देखना बहुत रोमांचक लगता है।

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