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लॉक डाउन का उल्लंघन करने पर ये हो सकती सजा

कई सारे लोग कोरोना लॉक डाउन में बेवजह घरों से बाहर निकल रहे हैं। कुछ लोग बीमारी से लोगों को बचाने में जुटे डॉक्टर, पुलिस, सफाई और मीडिया कर्मियों से उलझ रहे हैं। या कुछ अधिकारी या राजनेता इस दौरान भ्रष्टाचार की मलाई निकालने के फिराक में हैं। इसलिए ऐसे में उन्हें सावधान हो जाना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने पर आपकी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे कटेगी। उत्तराखंड हाईकोर्ट के वकील और आम लोगों के बीच कानूनी जागरूकता पर काम करने वाली संस्था भारतीय जागरुकता समिति के अध्यक्ष ललित मिगलानी उन कानूनी पहलुओं को हमारे सामने रख रहे हैं जिनके तहत लॉक डाउन का उल्लंघन करने वालों को सजा हो सकती है। 

लॉकडाउन की गाइड लाइंस नहीं मानने वाले पर क्या होगी कार्रवाई?
​लॉकडाउन के दौरान नियम और गाइडलाइंस नहीं मानने वाले पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के सेक्शन 51 के तहत कार्रवाई होगी। इसमें सजा और जुर्माने दोनों की बात है। लॉकडाउन नहीं मानने पर 200 रुपये का जुर्माना और साथ ही 1 महीने की सजा। लेकिन इसकी वजह से कानूनी व्यवस्था में दिक्कत आई, दंगे की स्थिति पैदा हुई दो सजा 6 महीने तक के लिए बढ़ जाएगी। अगर आपके हरकत से किसी की जान जाती है या खतरा पैदा होता है तो दोषी पाए जाने पर जेल होगी जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है।
क्या है 144 उल्लंघन का मतलब?
धारा 144 दंड प्रक्रिया संहिता के उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत दंड का प्रावधान है। जिसके उल्लंघनकर्ता को 6 माह की सजा या 1000 रुपये जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
क्या जानबूझकर इंफेक्शन फैलाना अपराध है?
जी हां, भारतीय दंड संहिता यानीआईपीसी के तहत कुछ ऐसी धाराएं हैं जो जानबूझकर इंफेक्शन फैलाने की सजा तय करती हैं। आईपीसी की धारा 269 किसी भी लापरवाह अधिनियम से संबंधित है। इसी तरह आईपीसी की धारा 270 किसी भी घातक कार्य से संबंधित है। जो जीवन के लिए खतरनाक संक्रमण फैलाने की संभावना है। भारतीय दंड संहिता की धारा 269 में प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसा काम करता है जिससे खतरनाक बीमारी फैलने का खतरा हो तो उसे छह माह, जबकि अतिरिक्त भारतीय दंड संहिता की धारा 270 के अनुसार किसी खतरनाक बीमारी के संक्रमण को फैलाने के लिए दो साल तक की कैद या जुर्माने या दोनों से दंडित करने का प्रावधान है।
सरकारी काम में दखल की क्या है सजा?
अगर कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक के कार्य में बाधा पहुचता है या उसको किसी प्रकार से चोटिल करता है तो उस पर क्या कार्यवाही हो सकती है?
– भारतीय दंड संहिता की धारा 332 के अनुसार जो भी कोई किसी लोक सेवक को, उस समय जब वह लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा हो उस समय डराए धमकाए, चोट पहुंचाए तो ये दंडनीय है। इसके लिए अपराधी को आर्थिक दंड के साथ ही एक  से तीन साल की जेल हो सकती है।
– भारतीय दंड संहिता की धारा 333 के अनुसार, जो भी व्यक्ति  लोक सेवक होने के नाते अपना काम कर रहा हो उसे अगर उसे किसी ने कोई गंभीर चोट हमला किया तो उसे आर्थिक जुर्माना के साथ ही 10 साल तक की सजा हो सकती है।
– अगर व्यक्ति इस दौरान जानबूझक जानलेवा हमला करता है और इसमें घटना को अंजाम दिया जाता है तो भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। जिसमें दोषी पाए जाने पर अपराधी के खिलाफ आजीवन कारावास तक की समा शामिल है।
क्या अफवाह फैलाने वालों और घोटालेबाजों को भी हो सकी है सजा? 
गृह मंत्रालय के ऑर्डर में कहा गया है कि अगर कोई कोरोना वायरस से संबंधित अफवाह फैलाता है, फिर उसे एक साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही जुर्माना भी लग सकता है। लोगों की सहायता के लिए दिए गए फंड में घोटाला करने वालों के खिलाफ भी एक्शन की बात कही गई है। ऐसे में दो साल तक की सजा। सरकारी अफसर भी इसके दायरे में होंगे। सरकार की बताई गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर कॉर्पोरेट पर भी जुर्माने की बात है।
(नैनीताल हाईकोर्ट के वकील ललित मिगलानी से Satyavoice.com संवाददाता पवन कुंवर की बातचीत पर आधारित रिपोर्ट)
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