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सावधान! दिल्ली-एनसीआर से कोरोना लेकर उत्तराखंड पहुंच रहे हैं लोग

दिल्ली-एनसीआर का इलाका उत्तराखंड के लिए कोरोना का एपी सैंटर बन चुका है। उत्तराखंड में शुक्रवार तक आए 153 मामलों में से सबसे ज्यादा केस दिल्ली-एनसीआर से जुड़े लोगों के नाम हैं। यानी कोरोना बीमारों में सबसे ज्यादा हिस्सा दिल्ली, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद का ही है। वैसे महाराष्ट्र और हैदराबाद से लौटे कुछ लोगों में भी कोरोना की पुष्टि हुई है। लेकिन इनकी संख्या बेहद कम है।

 

लॉक डाउन खुलने के बाद बड़े मरीज 

कोरोना लॉक डाउन खुलने से पहले उत्तराखंड में मरीजों की संख्या 70 से नीचे थी। लेकिन अब आंकड़ा 150 को पार कर गया है। विश्लेषण के बाद पता लगता है कि इसमें सबसे ज्यादा केस दिल्ली-एनसीआर यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से लौट रहे कामगारों से जुड़े हैं। लॉक डाउन में ढील के बाद दिल्ली समेत देश के कई और इलाकों से प्रवासी उत्तराखंडी मजदूर घर वापसी कर रहे हैं। लिहाजा ये अपने साथ कोरोना भी ला रहे हैं। जिससे राज्य के लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

 

हाईकोर्ट के निर्देश से राहत की उम्मीद

अभी तक कोई किसी भी जोन से आए उसे इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन करने की कोई व्यवस्था तय नहीं थी। लेकिन अब उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बाहर से आ रहे प्रवासियों की कोरोना जांच बार्डर पर ही करने और संक्रमण मिलने पर वहीं क्वारंटाइन करने को कहा है। ऐसा होने पर पहाड़ के जिलों को संक्रमण के खतरे से बहुत हद तक बचाया जा सकता है।

 

डरे हुए हैं ग्रामीण लोग 

बाहरी प्रदेशों से जिस तरह से लोग घर वापसी कर रहे हैं और गांवों में दस्तक दे रहे हैं। वो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहद डरा रहा है। क्योंकि क्वारंटीन फैसेलिटी सही न होने के कारण हर गांव में कोरोना का खतरा मंडरा रहा है। लिहाजा सरकार ने अब क्वारंटीन फैसिलिटी की मॉनीटरिंग के लिए अब गांव-गांव में टीचर्स को जिम्मेदारी सौंप दी है। ताकि ग्रामीण सुरक्षित महसूस कर सकें।

 

SATYAVOICE.COM की अपील

अगर आपके आपके गांव, मोहल्ले या इलाके में कोई भी अनजान शख्स दिखाई दे या कोई भी व्यक्ति बुखार, सर्दी, जुकाम के लक्षण छिपाता हुए दिखे तो गुप्त तरीके से पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को अवश्य सूचित करें। ताकि आप संक्रमण से बचे रहें।

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