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बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए सरकार ने बनाया प्लान

पहाड़ों में पलायन का सबसे बड़ा कारण और किसानों की खेती छोड़ने की सबसे बड़ी वजह जंगली जानवर हैं। जंगली जानवरों से खेती को निजात दिलाने की मांग भी अब लगातार चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। सरकार के विधायक भी कई बार विधानसभा में बंदरों को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग कर चुके हैं। इसी को देखते हुए अब सरकार ने बंदरों से निजात दिलाने के लिए दो बंदर बाड़ा बनाने निर्णय लिया है।

गढ़वाल और कुमाऊं में बनेंगे दो बंदर बाड़े

बंदरों के आतंक से लोगों को निजात दिलाने के लिए अब प्रदेश में करीब 25-25 हजार की क्षमता वाले दो बंदरबाड़े बनेंगे। सौ-सौ हेक्टेयर वाले इन बाड़ों में से एक कुमाऊं और एक गढ़वाल में स्थापित किया जाएगा। मंगलवार को सचिवालय में हुई राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इसी के साथ बोर्ड ने बंदरों को पीड़क (वर्मिन) घोषित करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने को भी सहमति दी।

बोर्ड ने माना कि प्रदेश में बंदरों का आतंक बढ़ रहा है। बंदर फसल चौपट कर रहे हैं और लोग इस वजह से खेती छोड़ रहे हैं। बंदरों की नसबंदी के परिणाम भी तुरंत सामने नहीं आएंगे। बोर्ड के सामने हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर बंदरों को पीड़क घोषित कर मारने की अनुमति का प्रस्ताव रखा गया था। बोर्ड ने इस प्रस्ताव को अनुमति दी, लेकिन कहा कि इससे समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा। लोग बंदरों को धार्मिक भावना के कारण मारते नहीं हैं।

तय किया गया कि प्रदेश में दो स्थानों पर बनने वाले बंदरबाड़ों को इस तरह से विकसित किया जाएगा कि वहां बंदर प्राकृतिक आवास के रूप में रह सकें। इनके लिए प्राकृतिक आहार की व्यवस्था भी यहां की जाएगी और लोग चाहें तो यहां बंदरों को चना चबेना भी दे सकेंगे।

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