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लोकप्रियता के शिखर पर योगी

Archive Report : Aug 16, 2019

सत्यजीत पंवार

इस बार स्वतंत्रता दिवस के दिन सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ छाए रहे। उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्विटर पर #yoginumber1cm  मुहिम चलाई और देखते ही देखते इस हैशटैग के साथ योगी की तारीफों वाले संदेशों की बाढ़ आ गई। लोगों ने योगी सरकार के दो साल के कामकाज की दिल खोल कर तारीफ की और उन्हें देश का सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री बताया जाने लगा। सोशल मीडिया पर अचानक शुरू हुए इस हैशटैग ट्रैंड की असल वजह हिंदी भाषी न्यूज चैलन आजतक और कार्वी इनसाइट्स का एक सर्वे है, जिसमें योगी आदित्यनाथ को देश का सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री घोषित किया गया है। बारह हजार से ज्यादा (12126) लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार किए गए इस सर्वे को स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले 14 अगस्त को जारी किया गया। सर्वे में इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल से लेकर देश के सभी मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल को लेकर सवाल किए गए। सर्वे के मुताबिक बीस फीसदी लोगों ने योगी आदित्यनाथ को सबसे बेहतर मुख्यमंत्री बताया। योगी के बाद दूसरे नंबर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रहे।

योगी आदित्यनाथ के लिए यह सर्वे बेहद खास है। इस साल जनवरी में उत्तर प्रदेश में हुए इसी तरह के एक सर्वे में योगी को 40 फीसदी लोगों ने पसंद किया था। इससे पहले पिछले साल अगस्त में हुए एक सर्वे में उन्हें तीस प्रतिशत लोगों ने ही बेहतर मुख्यमंत्री बताया था। इस लिहाज से देखें तो योगी की लोकप्रियता में हुई इस बढ़ोतरी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अच्छी खासी बढ़त दे दी है। साथ ही योगी पर लगातार निशाना साधने वाले विपक्षी दलों को भी करारा जवाब मिल गया है। योगी के पक्ष में आए इस सर्वे को उनके दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड कहना गलत नहीं होगा। दो साल के कार्यकाल में योगी ने जिस तरह एक से बढ़ कर एक फैसले लिए उनसे उत्तर प्रदेश की जनता बेहद खुश है।

संन्यास से सत्ता के शिखर तक पहुंचने की इस यात्रा में योगी आदित्यनाथ के सामने तमाम चुनौतियां आई, जिन्हें उन्होंने अपने राजनीतिक कौशल के दम पर फतह किया। योगी के राजनीतक दमखम का इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा कि आज वे किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश का कोईव भी ऐसा राज्य नहीं है जहां के लोग योगी आदित्यनाथ के नाम से वाकिफ हों।

पांच जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लाक के एक छोटे से गांव पंचुर में जन्मे योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह बिष्ट है। शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने बीएससी की पढ़ाई के लिए कोटद्वार डिग्री कालेज में दाखिला लिया। यहीं से उनका झुकाव छात्र राजनीति की तरफ हुआ और वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए। यहां वे छात्रसंघ का चुनाव लड़ना चाहते थे, मगर उन्हें टिकट नहीं मिला। अपने साथियों के कहने पर उन्होंने बागी होकर महासचिव पद पर चुनाव लड़ा मगर वे हार गए। इस हार के बाद योगी राजनीति से इतर पठन-पाठन में जुट गए। उन्होंने गोरखपुर स्थित प्रसिद्ध गोरक्षपीठ के गुरु गोरखनाथ पर शोध करना शुरू कर दिया। इसी दौरान गोरक्षनाथ पीठ के महंत अवैद्यनाथ की नजर उन पर पड़ी जो उनके अध्यात्मिक रुझान से बेहद प्रभावित हुए। इस तरह दोनों के बीच आदर और स्नेह का भाव प्रगाढ़ होता गया और  22 वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास की दीक्षा ले ली। महंत अवैद्यनाथ ने अजय सिंह बिष्ट को नया नाम दिया, योगी आदित्यनाथ। मंहत अवैधनाथ ने योगी को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया और चार वर्ष बाद सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया। इसके बाद युवा योगी के कंधों पर गोरक्षपीठ की धार्मिक जिम्मेदारी के साथ-साथ राजनीतिक विरासत को संभालने का दायित्व भी आ गया।

अब योगी आदित्यनाथ गांव-गांव, गली-गली जाकर राजनीतिक पुनर्जागरण के मिशन में लग गए। गोरक्षपीठ की परंपरा के मुताबिक योगी ने पूर्वी यूपी में व्यापक जनजागरण का अभियान चलाया। सहभोज के माध्यम से छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ अलख जगते हुए योगी ने युवाओं को संगठित करना शुरू कर दिया। योगी से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में युवा उनकी टोली में जुड़ने लगे। इस तरह उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी। योगी ने गोवंश संरक्षण को अपनी प्राथमिकता में रखा और इसके लिए जी जान से जुड गए। अब योगी की लोकप्रियता पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में फैल गई। सन 1998 में उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें गोरखपुर संसदीय सीट से लोकसबा का चुनाव लड़ने का आदेश दिया जिसे शिरोधार्य करते हुए योगी सक्रिय राजनीति में उतर गए। योगी को चुनाव में विजय मिली और वे 26 वर्ष की उम्र में सबसे युवा सांसद बन कर लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर, संसद पहुंच गए। इसके बाद सन 1999 से लेकर 2004, 2009 और 2014 के चुनाव में योगी लगातार गोरखपुर संसदीय सीट से चुनाव जीत कर संसद पहुंचते रहे। संसद में सक्रिय उपस्थिति और राजनीतिक कौशल के दम पर वे कई मंत्रालयों की स्थाई समिति के सदस्य बने। हिंदुत्व के प्रति अगाध प्रेम के चलते योगी को विश्व हिंदू महासंघ जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भारतीय इकाई के अध्यक्ष का दायित्व दिया जिसका सफलता पूर्वक निर्वहन करते हुए उन्होंने वर्ष 1997, 2003 तथा 2006 में गोरखपुर में और वर्ष 2008 में तुलसीपुर में विश्व हिंदू महासंघ के अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन का सफल आयोजन करवाया।

वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव देश की राजनीति के साथ ही योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक जीवन के लिए बेहद अहम साबित हुआ। तब योगी ने उत्तर प्रदेश समेत देश के लगभग सभी राज्यों में धुआंधार तरीके के चपनाव प्रचार किया और भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की।  अपनी फायरब्रांड छवि के चलते योगी लोगों के दिलो दिमाग में ऐसे छाए कि जहां-जहां उन्होंने प्रचार किया था, वहां वहां भाजपा के प्रत्याशियों को शानदार जीत मिली। इसके बाद वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में योगी ने इसी तरह धुआंधार प्रचार किया। उन्होंने  प्रदेश में लगभग 175 से ज्यादा सभाएं की। विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला दिसके बाद 19 मार्च 2017 को योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

योगी के सत्ता संभालने के बाद बदलता उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालते हुए योगी आदित्यनाथ को दो वर्ष से ज्यादा हो चुके हैं। इस दौरान उत्तर प्रदेश में उन्होंने जिस कुशलता से सरकार चलाई उसका प्रमाण हालिया सर्वे के रूप में सबके सामने है। इसी वर्। 19 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के दो साल पूरे होने के अवसर पर लखनऊ में प्रेसकांफ्रेस बुलाई और अपना रिपोर्ट कार्ड पेश किया। दो साल की उपलब्धियों के क्रम में योगी ने सबसे बहले कानून व्यवस्था के मुद्दे पर बाद की और कहा कि उनकी सरकार ने दो वर्ष के भीतर उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के क्षेत्र में रिकार्डतोड़ काम किए हैं। योगी ने बताया कि पिछले 24 महीने में उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण ये है कि इस अवधि में राज्य में एक भी दंगा नहीं हुआ। आंकड़े देते हुए योगी ने बताया कि, उनकी सरकार बनने के बाद पुलिस ने करीब साढ़े तीन हजार मुठभेड़ की हैं जिनमें 70 से ज्यादा कुख्यात अपराधी मारे गए और करीब एक हजार अपराधी घायल हुए। योगी ने कहा कि उनकी पुलिस इन दो वर्षों में 8000 अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफल रही। इसके अलावा उन्होंने बताया कि इन दो वर्षों में बारह हजार के करीब अपराधी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इतना ही नहीं, पुलिस की सक्रियता और ठोस एक्शन के बाद बड़ी संख्या में अपराधियों ने उत्तर प्रदेश छोड़ दिया है और प्रदेश में भयमुक्त वातावरण बन चुका है। योगी ने कहा कि उनकी सरकार प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, और प्रदेश में अपराध रोकने में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। इस प्रेस कांफ्रेंस में योगी ने तमाम दूसरी उपलब्धियों के बारे में भी आंकड़े रखे जिनमें प्रयागराज कुंभ के सफल आयोजन से लेकर, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के क्षेत्र में लिए गए फैसलों की जानकारी थी। कुल मिलाकर 19 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से अब लगभग ढाई साल के कार्यकाल की समीक्षा की जाए तो योगी का जलवा साफ नजर आता है।

2017 के विधानसभा चुनाव में कानून व्यवस्था बड़ा मुद्दा था। तब भाजपा ने कानून व्यवस्था के मुद्दे को अपने घोषणापत्र में जोरशोर से उठाया था। भाजपा ने तब समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार पर आपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए खूब हमले किए थे। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल की बात करें तो तब उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था बुरी तरह पटरी से उतर चुकी थी। तब प्रदेश में हत्या, बलात्कार, खनन माफिया की गुंडागर्दी, लूट, डकैती समेत छोटी-बड़ी आपराधिक घटनाओं की बाढ़ आ गई थी। बदमाशों के हौसले बुलंद थे और पुलिस लाचार। पूरा प्रदेश भयग्रस्त था। भाजपा की हर चुनावी रैली में अखिलेश सरकार को अपराधियों की संरक्षणदाता बताया गया और जनता से अपील की गई कि प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने के लिए भाजपा को वोट दें।          भाजपा ने जनता से वादा किया कि प्रदेश में सरकार बनने पर एंटी भू-माफिया अभियान चलाया जाएगा। साथ ही महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए अलग से पुलिस फोर्स गठित की जाएगी। इसके अलावा पुसिलबल को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए खुली छूट दी जाएगी। आए दिन हो रही आपराधिक घटनाओं और ध्वस्त होती कानून व्यवस्था से तंग आकर तब उत्तर प्रदेश की जनता ने भाजपा के वादों पर भरोसा किया और प्रचंड बहुमत देकर सत्ता सौंप दी।
19 मार्च 2017 को जब योगी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उस शपथ के शब्द दूर तक सुनाई दिए थे। सूबे का निजाम बदला तो नजारे भी बदलने लगे। हुकूमत संभालने वाले हाथ बदले तो हालात भी बदलने लगे। एक भगवाधारी 5-कालीदास मार्ग पहुंचा तो प्रदेश  पूरा राजनीतिक परिदृश्य ही बदलने लगा प्रदेश का। बात अवैध बूचड़खानों की हो या रोड साइड रोमियो की, योगी ने बंदी और पाबंदी के साथ  नई शुरूआत की। देखते-देखते असर दिखने लगा। छेड़छाड़ करने वाले सलाखों के पीछे डाले जाने लगे जिसका सुखद परिणाम यह है कि अब उत्तर प्रदेश की सड़कों पर लड़कियां सुरक्षित होकर निकलती हैं। दो साल पहले तक जनता का कानून व्यवस्था से भरोसा डोल चुका था, इस भरोसे को वापस पाना योगी से लिए बड़ी चुनौती थी। इसलिए योगी पद संभालते ही एक्शन में आ गए, जिसकी तस्वीर आज प्रदेश देख रहा है।
भाजपा के सत्ता में आने के बाद योगी आदित्यानाथ ने जैसे ही कार्यभार संभाला उन्होंने चुनावी वायदों के मुताबिक फैसले लेने शुरू कर दिए। कानून व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए योगी सरकार ने सबसे अहम फैसला महिला सुरक्षा को लेकर लिया और प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया। महिलाओं के साथ छेड़-छाड़ करने वाले अपराधी एंटी रोमियो स्क्वायड के निशाने पर आ गए और लगातार दबोचे जाने लगे। मुख्यमंत्री योगी ने जैसे ही यूपी पुलिस को खुली छूट देते हुए अपराधियों के खिलाफ एक्शन लेने के निर्देश दिए, पुलिस महकमा हरकत में आ गया। प्रदेश में हर रोज कुख्यात अपराधी एनकाउंटर में ढेर होने लगे। बड़ी संख्या में अपराधी सलाखों के पीछे डाल दिए गए। योगी की सख्ती को लेकर तब खूब हाय−तौबा मची। विपक्षी दलों से लेकर तमाम मानवाधिकार संगठनों ने मानवाधिकारों की दुहाई देते हुए पुलिसिया मुठभेड़ों पर सवाल खड़े किए। अदालत का दरवाजा तक खटखटाया गया, मगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने फैसले पर अड़े रहे और पुलिस को खुलू छूट की बात दोहराते रहे। इसी तरह गौ रक्षा के मुद्दे पर पर भी प्रशासन ने जबर्दस्त अभियान चलाया और बदमाशों के हौसले पस्त कर दिए। इसी तरह दूसरे मोर्चों पर भी योगी ने एक्शन दिखाना शुरू कर दिया। शिक्षा पर एक्शन तो आते ही शुरू हो गया था, जब आते ही नकलविहीन परीक्षा कराके दिखाई। कुल मिलाकर सीएम योगी की कार्यशैली देख कर स्पछ्ठ है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने का जो भरोसा 2017 के विधानसभा चुनाव में दिया था, उसे वे पूरा करके रहेंगे।
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में शानदार इनवेस्टर्स मीट आयोजित कर योगी ने प्रदेश में रोजगार की संभावना के अमीस दरवाजे खोल दिए हैं। इनवेस्टर्स मीट के उद्घाटन के दिन खुद देश के गृहमंत्री अमित शाह ने लखनऊ पहुंच कर योगी की पीठ थपथपाई। इनवेस्टर्स मीट को लेकर उत्तर प्रदेश के युवाओं में खासा उत्साह है और उन्हें उम्मीद है कि यह मीट रोगजार के रास्ते खोलने में मील का पत्थर साबित होगी। कुल मिलाकर कहना गलत नहीं होगा कि लंबे समय बाद उत्तर प्रदेश में एक ऐसा शख्स मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा है जो सांसारिक मोह माया को त्याग कर अपना जीवन जन सेवा के लिए समर्पित कर चुका है। इतिहास गवाह है कि जब भी सत्ता साधु के संरक्षण में रही है, राज्य में विकास की गंगा बही है।

बहुआयामी व्यक्तित्व– योगी आदित्यनाथ को देशभर में अधिकतर लोग उनके राजनीतिक कौशल के चलते जानते हैं, मगर योगी के व्यक्तित्व के कई ऐसे आयाम हैं जो उन्हें विशिष्ट बनाते हैं।
             योगी उच्च कोटि के लेखक भी हैं। उन्होंने यौगिक षटकर्म, हठयोग-स्वरुप एवं साधना, राजयोग- स्वरुप एवं साधना और हिन्दू राष्ट्र नेपाल जैसी किताबें लिखी हैं। साथ ही समय समय पर उनके विचार स्तंभ के रुप में तमाम समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं। वे गोरखनाथ मंदिर से प्रकाशित होने वाली वार्षिक पुस्तक योगवाणी के प्रधान संपादक भी हैं।

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