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जालिम पेट की ये है खास बिमारियां !

कुलदीप तोमर

पेट की बिमारियां भी अजीब है। पेट खराब हो तो शरीर के सभी अंगों पर असर छोड़ता है। चाहे वह एसिडिटी हो या लूज मोसन या हो फिर मोटापा। खासबात ये है कि ये बिमारियां अगर समय पर ठीक ना हो तो बाद में रौद्ररूप धारण कर लेती है। हर्ट बर्न जैसी गंभीर बिमारियों की वजह पेट की एसिडिटी ही होती है। मरीज भी इन छोटी बिमारियों की अनदेखी कर बाद में जटिल बिमारियों को दवात देने को तैयार रहते है। मगर यदि छोड़ी सावधानी और सटीक ईलाज कराया जाए तो हम इन बिमारियों पर शुरूआती दौर में बहुत जल्दी लगाम लगा सकते है। पेट की अधिकांश बिमारियों पर बात की फॉर्टिस अस्पताल की सीनियर कंसलटेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट व वरिष्ठ पेट रोग विशेषज्ञ डॉ.मोनिका जैन से।

एसिडिटी

यदि आपको खट्टी डकारें आती है, भोजन ठीक से नहीं पचता, सीने में दर्द रहता है या छाती में जलन रहती है तो आपको एसिडिटी है। एसिडिटी को मेडिकल भाषा में गैस्ट्रो एसोफेजियल रिफलक्ल डिजीज(जीईआरडी) कहते हैं। एसिडिटी होने से शरीर का पाचन तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो जाता है। एसिडिटी में छाती में जलन होती है और आहारनाल में उत्पन्न अम्ल लौट कर मुंह में आता रहता है। अगर वक्त रहते एसिडिटी पर काबू ना किया जाए तो एक समय बाद हमारे आहारनाल सिकुड़ जाती है। जिससे शरीर में कई अन्य परेशानियों का सामना करना पडता है। डॉ.मोनिका जैन के अनुसार, टीवी पर एसिडिटी से छुटकारा दिलाने वाली दवाओं के विज्ञापन पर मरीज को कभी गौर नही करना चाहिए। इन दवाइयों से एसिडिटी का ईलाज करगें तो थोड़े समय के लिए राहत जरूर मिलेगी लेकिन जल्द ही सारी परेशानियां फिर घेर लेगी। लंबे समय तक इन साल्ट का प्रयोग करना भी शरीर के लिए काफी खतरनाक है। एसिडिटी का ईलाज सिर्फ दवाईयों से ही मुमकिन नही है, आप अपने खान-पान को बदलकर भी इस समस्या से निजात पा सकते हैं। यदि समय रहते इस समस्या पर गौर नही करेंगे तो एक समय बाद ये आपके शरीर को बहुत घातक नुकसान पंहुचा सकती है।

एसिडिटी के मरीज बरतें ये सावधानियां

  • -वक्त पर खाएं खाना
  • -ज्यादा तले-भुने खाने से रखें परहेज
  • -ना ले ज्यादा टेंशन
  • -खाना खाने के तुरन्त बाद पानी ना पीएं
  • -पिएं ज्यादा से ज्यादा पानी
  • -भोजन को ज्यादा देर तक चबाकर खाएं,खाते समय जल्दबाजी ना करें।
  • -धुम्रपान से  बचें।

लीवर सिरॉसिस: लीवर पर बढ़ती चर्बी

लीवर में सामान्य से अधिक मात्रा में चर्बी जमा हो जाए तो आप ‘फैटी लीवर’ के उन 15-20 प्रतिशत मरीजों में शामिल हो सकते है जिन्हें बाद में जानलेवा रोग लीवर सिरॉसिस हो जाता है। लीवर में खुद को रिपेयर करने का अनोखा गुण तो होता ही है साथ ही उस पर अनेक तरह के खतरें भी मंड़राते रहते है।  लीवर पर ज्यादा चर्बी जमा होना भी इन्ही में से एक है। जंक फूड या तली हुई चीजें खाने वालों में ही चर्बी की अधिकता नही होती, बल्कि शूगर, हेपेटाइटिस बी या सी के संक्रमण, थायराइड भी लीवर में चर्बी के अतिक्रमण की वजह बनते है। इसलिए दुबला-पतला व्यक्ति भी फैटी लीवर की चपेट में आ सकता है। पेट के दाएं हिस्से में दर्द, उल्टी की प्रवृत्ति, सुस्ती, हमेशा थकावट रहना आदि फैटी लीवर के प्रमुख लक्षण है। अगर फैटी लीवर का कारण मोटापा है तो वजन घटाना ही इसकी सबसे बड़ी दवाई है।

फैटी लीवर से बचने के उपाय

  • -अगर शराब का सेवन करते है तो तुरन्त छोड़ दें
  • -तली-भुनी चीजों से परहेज रखें
  • -ज्यादा फैटी फूड ना खाएं
  • -यदि वजन जल्दी-जल्दी बढ़ रहा है तो चिकित्सक की सलाह ले उपचार कराएं

पेट दर्द

पेट में दर्द है। अक्सर ये हमारी शिकायत रहती है। मगर ये शिकायत शरीर के लिए काफी गंभीर है। पेट में दर्द कई कारणों से हो सकता है। चिकित्सक डॉ. मोनिका जैन के अनुसार पेट दर्द कब्ज, गैस, दस्त आदि की वजह से आमतौर पर होता है। कई बार बच्चों के पेट में कीड़े होने की वजह से भी पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। हम जल्दबाजी में पेट दर्द को ठीक करने के लिए पेनकीलर ले लेते हैं। मगर ये सही ईलाज नही है। इससे बाद में काफी गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। क्योंकि कई बार पेट की आंतों में संक्रमण होने के कारण भी पेट दर्द हो जाता है। इसमें बाद में मल या उल्टी के द्वारा खून आता है। कई बार गुर्दे में पथरी होने के कारण भी दर्द उठता है। यदि ऐसे में आप पेनकीलर ले लेते हैं। तो बाद में परेशानी बढ़ेगी ही। पेट दर्द का एक कारण अपेंडिक्स भी हो सकता है। आंतों में सूजन आ जाने से भी पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। पेट दर्द होने पर तुरन्त चिकित्सक से सलाह लें। उचित उपचार करा ही दवाईयों का सेवन करें।

पेट दर्द रहता है तो बरतें ये सावधानियां

  • -साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
  • -खाली पेट नशा ना करें, ना ही कोई दवाई लें
  • -शुद्ध पानी पीएं
  • -पेन कीलर का सेवन बिल्कुल ना करें

कब्ज व डायरिया के लिए आंतों का मिजाज भी समझें

भोजन पचने में दिक्कत होती है या आप बार-बार बाथरूम जाने की जरूरत महसूस करते है तो इसे हल्कें में ना लें। मुमकिन है कि आपकी आंतों का मिजाज सही न हो। कब्ज, डायरिया कई वजह से होते हैं, ऐसे में इनका कारण पता चल जाए तो इलाज आसान हो जाता है। डॉ.मोनिका जैन बताती है कि ये रोग आंतों के मिजाज पर भी निर्भर रहते है। आंत तुनकमिजाज है तो अक्सर डायरिया के होने की संभावना रहती है, आंत सुस्त है तो कब्ज की शिकायत रहेगी। आंत के तुनकमिजाज होने वाले के लक्षण को ‘इरिटेबल बावेल सिंड्रोम’ कहते हैं जिसका अर्थ है तंग कर देने वाले पेट के लक्षण। आईबीएस पेट की एक बहुत बड़ी समस्या है। तनाव आंत के मिजाज को उकसाने का काम करता है इसलिए तनावरहित होने की क्रियाओं से बहुत फायदा पहुंचता है। आंत अतिसंवेदनशील (हाईपर सेंसेटिव) हुई तो आप डायरिया से, हाईपोसेंसेटिव यानि सुस्त हुई तो कब्ज से परेशान होते रहेगें। इसके बचाव के लिए तनावरहित क्रिया व जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है अन्यथा आप दवाई खाते रहेंगे मगर इन बिमारी से पूर्णरूप से निजात नही मिल पाएगी।

डॉ.मोनिका जैन, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट

फास्ट फूड है सबसे खतरनाक

पेट को सही रखना है तो फास्टफूड से परहेज करना होगा। विशेषज्ञ डॉ.मोनिका जैन के अनुसार पेट की अधिकांश बिमारियां फास्ट फूड का अधिक सेवन करने की वजह से ही उत्पन्न होती है। फास्ट फूड में शुगर और कैलोरी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। ज्यादा शूगर को शरीर पचा नही पाता और शरीर में शूगर की मात्रा बढ़ जाती है इसलिए हम डायबिटीज जैसी बिमारियों की चपेट में आ जाते है। यही शूगर बाद में फैट बन जाती है जिससे मोटापा बढता है। वही फास्ट फूड में न्यूट्रिशनल वैल्यू नाममात्र को मिलता है, शरीर को पर्याप्त एनर्जी नही मिल पाती। शरीर में ज्यादा फैट होने से मोटापा तो बढ़ता ही है इसके अलावा हमारे दिल के लिए भी ये बेहद खतरनाक होता है। फास्ट फूड में ऑक्सिकॉलेस्ट्रोल भी बहुत ज्यादा पाया जाता है, इससे पेट की पाचन क्रिया खराब होने का खतरा रहता है। फास्ट फूड में डलने वाले फ्लेवर भी शरीर के लिए बहुत घातक होते है। यदि हम फास्ट फूड से परहेज करें और संयमित भोजन लें तो बहुत हद तक पेट ठीक रहता है।

       डॉ.मोनिका जैन, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट सीनियर कंसलटेंट

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