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उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष की रेस में दौड़ रहे हैं ये महारथी

अजय भट्ट- नैनीताल से सांसद और बीजेपी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष भट्ट का इस बार भी रेस में सबसे आगे है। क्योंकि सत्ता की नाव में तैर रही बीजेपी को 2022 में सत्ता में वापसी के लिए तेज तर्रार प्रदेश अध्यक्ष की जरूरत होगी। इसलिए भट्ट का पलड़ा इस मामले में भारी है। भट्ट भले ही मोदी लहर के बावजूद साल 2017 में रानीखेत से चुनाव हार गए हों लेकिन उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते बीजेपी  57 सीट जीत राज्य की सत्ता में काबिज हो गई। इसके बाद नगर निकाय, लोकसभा और ग्राम पंचायतों के चुनाव में भी बीजेपी का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। इसलिए संभव है कि उन्हें पार्टी संगठन की कमान दोबारा सौंप दी जाए। दूसरी तरफ गढ़वाल से ठाकुर मुख्यमंत्री और कुमाऊं से ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष के कांबिनेशन में भी भट्ट फिट बैठते हैं। साथ ही सीएम त्रिवेंद्र रावत के साथ अच्छी ट्यूनिंग, राष्ट्रीय सह महामंत्री शिवप्रकाश का आशीर्वाद भट्ट के दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनने में मददगार साबित हो सकता है।

बलराज पासी- कभी 35 साल की उम्र में कांग्रेस के कद्दावर नेता एनडी तिवारी को हराने वाले फायर ब्रांड नेता बलराज पासी किसी बेहतर ब्रेक की तलाश में हैं। लोकसभा में प्रबल दावेदार होने के बावजूद पासी को टिकट नहीं मिला। लेकिन लोकसभा के दौरान जिस तरह से पीएम मोदी रैली खत्म होते हुए बलराज की पीठ पर हाथ फेरकर गए उससे पासी को उम्मीद है। हालांकि सीएम त्रिवेंद्र का रुख पासी को लेकर क्या रहता है ये देखने वाली बात होगी।

बंशीधर भगत- यूपी से लेकर उत्तराखंड तक लगातार मंत्री बने आ रहे कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत को प्रदेश में ब्राह्मण राजनीति का मजबूत चेहरा माना जाता है। इसलिए अगर जातीय फॉर्मूले पर अजय भट्ट को कुमाऊं से अगर सबसे ज्यादा कोई नाम से खतरा है तो वो हैं बंशीधर भगत।  माना जा रहा है कि वरिष्ठतम विधायक होने के बावजूद भी मंत्री न बन पाने की वजह से थोड़ा मायूस भगत को पार्टी प्रदेश की कमान सौंप सकती है। भगत की संघ के बीच बेहतर पकड़ है और उन्हें संगठन की भी बेहतर समझ है।

अरविंद पांडे- शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे कुमाऊं के सबसे तेज ब्राह्मण राजनीतिक चेहरे हैं। पिछले 15 दिनों में पांडे का नाम प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में सबसे ज्यादा तेजी से दौड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के एक खेमे ने उन्हें इसके लिए मन बनाने को कहा है। जिसके लिए पांडे की इन नेताओं से एक दौर की बातचीत भी हो चुकी है। हालांकि ये तय नहीं है कि अरविंद पांडे इसके लिए अभी तैयार हैं कि नहीं।पांडे अपने गर्म तेवरों के कारण जाने जाते हैं। हालात ऐसे रहते हैं कि वो अपनी बेबाकी से कई दफा सरकार को भी असहज कर देते हैं। पार्टी ऐसे गर्म और बेबाक नेता को प्रदेश की कमान सौंपती है तो 2022 में इसका फायदा एंटी इंकमबेंसी कम करने के लिए मिल सकता है।

अजय टम्टा- पिछली मोदी सरकार में राज्य मंत्री रहे और वर्तमान में अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा एक दलित चेहरे के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष की रेस में शामिल हैं। क्योंकि प्रदेश में जनसंख्य़ा के लिहाज से राजपूतों के बाद दलित दूसरे नंबर पर हैं। लिहाजा पार्टी नेतृत्व इस बार किसी दलित को प्रदेश अध्यक्ष बना कर इस वोट बैंक पर दांव खेल सकती है। ताकि 2022 में सत्ता की चाभी बीजेपी के हाथ ही रहे।

धन सिंह रावत- इन्हें संगठन का कीड़ा कहा जाता है। प्रदेश संगठन मंत्री रहते उन्होंने पार्टी को खड़ा करने में अहम रोल निभाया है। उन्हें त्रिवेंद्र रावत कैबिनेट का सबसे ज्यादा दौड़ा-भागी करने वाला मंत्री कहा जाता है। हालांकि सीएम के खुद गढ़वाली राजपूत होने के कारण धन सिंह का प्रदेश अध्यक्ष बनना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन दूसरी तरफ धन सिंह के चाहने वाले कह रहे हैं कि अगर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह दोनों गुजरात से हो सकते  हैं तो फिर इस फॉर्मूले को उत्तराखंड में भी तोड़ा जा सकता है।

गजराज बिष्ट- पूर्व प्रदेश महामंत्री और वर्तमान में प्रदेश मंडी परिषद के अध्यक्ष गजराज बिष्ट का नाम भी अध्यक्ष की रेस में शामिल है। पार्टी अगर किसी युवा राजपूत चेहरे के नाम पर विचार करे तो गजराज की लॉट्री भी खुल सकती है।

सुरेश जोशी- पूर्व प्रदेश महामंत्री और वर्तमान में बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी पार्टी के तेज-तर्रार युवा नेताओं में से एक हैं। जोशी पार्टी का पक्ष हर मंच पर पुरजोर तरीके से रखते हैं। पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जिले से आने वाले जोशी का नाम प्रदेश अध्यक्ष की रेस में तेजी से दौड़ रहा है। उनके समर्थक दावा कर रहे हैं कि पहाड़ से अजय भट्ट के बाद अगर रेस में कोई नाम है तो वो हैं सुरेश जोशी।

राजू भंडारी- वर्तमान में बीजेपी के प्रदेश महामंत्री राजू भंडारी सौम्य स्वभाव के नेता हैं। उनकी पार्टी के हर गुट के नेताओं से अच्छी बातचीत है। ऐसे में अगर किसी युवा ठाकुर नेता को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपने की बारी आई तो भंडारी की लॉट्री भी खुल सकती  है।

कैलाश शर्मा- अल्मोड़ा बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश शर्मा का नाम रेस में है। उनके भाई पूरन चंद्र शर्मा पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। लेकिन एक बार कैलाश शर्मा पार्टी से बगावत कर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इसलिए पार्टी के भीतर उनकी पैरवी थोड़ा कमजोर है।

प्रकाश हर्बोला- हिंदू जागरण मंच के नेता रहे प्रकाश हर्बोला इस समय दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री हैं। बीजेपी के प्रदेश सचिव और अनुशासन समिति के प्रमुख पद पर तैनात हर्बोला पार्टी के बेहद ऊर्जावान नेता हैं।

कुमाऊं से ब्राह्मण चेहरे के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष की रेस में उनका नाम शामिल है। अगर किसी फ्रेश ब्राह्मण चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की बारी आई तो हर्बोला की किस्मत भी खुल सकती है।

 

कैलाश पंत- बीजेपी के पूर्व प्रदेश संगठन मंत्री रहे कैलाश पंत का नाम ब्राह्मण चेहरे की वजह से इस रेस में शामिल है। हालांकि उन्हें राज्य बीजेपी की कमान मिलने की संभावना कम ही है।

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