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ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण, लक्षण व उपचार

प्रस्तुति-कुलदीप तोमर

आर्थराइटिस के 100 से भी अधिक प्रकार होते हैं, लेकिन मुख्य रूप से देखे जानेवाले प्रकार तीन हैं। ये हैंऑस्टियोआर्थराइटिस,रुमेटॉइड और सोरायटिक आर्थराइटिस। ऑस्टियोआर्थराइटिस बढ़ती उम्र में होने वाला रोग है और अधिकतर लोग इससे परिचित होते हैं, बाकी के दोनों आर्थराइटिस भी काफी खतरनाक हैं। आर्थराइटिस डे पर प्रस्तुत है आर्थराइटिस के तीनों प्रकारों पर विशेष जानकारी।

समझे आर्थराइटिस को

आर्थराइटिस को ही गठिया भी कहते हैं। इस बिमारी से पीडित मरीज की हड्डियों में सूजन, अकड़न और जोड़ों में दर्द रहता है। गठिया बिमारी धीरे-धीरे शरीर में प्रवेश करती है। विशेषज्ञों के अनुसार,हड्डियों के जोड़ो में यूरिक एसिड जम जाने की वजह से वह जोड़ सही रूप से काम नही कर पाते,इस बिमारी को गठिया या आर्थराइटिस कहते हैं। यूरिक एसिड के जमा हो जाने से मरीज के जोड़ों में गाठें भी बन जाती है। गठिया के भी कई प्रकार है। गठिया बिमारी धीरे धीरे अपना रूप दिखाती है और यह पूरे शरीर की हड़डियों तक पंहुच जाती है। यह बिमारी किसी को भी हो सकती है। मगर अक्सर देखने में आया है कि महिलाओं में यह बिमारी अधिकांश मेनोपॉज के बाद ही होती है। वही पुरूषों में यह बिमारी अधिक पाई गई है। बदलती जीवनशैली के कारण यह बिमारी अब युवाओं में भी देखने को मिल रही है।

-क्या है ऑस्टियोआर्थराइटिस

ऑस्टियोआर्थराइटिस आर्थराइटिस का सबसे आम प्रकार है जोकि बहुतायात में देखने को मिलता है। आजकल बदलती जीवनशैली की वजह से यंगस्टर्स भी इसकी चपेट में आ रहे हैँ। इस प्रकार के आर्थराइटिस में शरीर का भार वहन करने वाले अंग के जोड़ों में दर्द होता है। ज्वाइंट की कार्टिलेज कमजोर होने की वजह से यह दर्द होता है। लापरवाही बरतने पर यह जोड़ों में सूजन का कारण बन जाता है। 50 वर्ष की उम्र के बाद रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोन्स में बदलाव की वजह से  ऑस्टियोआर्थराइटिस से महिलाएं ज्यादा ग्रस्त होती है। मोटापे की वजह से आॅस्टियोआर्थराइटिस ओर अधिक बढ़ता है क्योंकि मोटापे की वजह से घुटनों पर शरीर का ज्यादा भार पड़ता है।

 यह है ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण

-घुटने में दर्द की शिकायत लंबे समय तक बने रहना
-सुबह उठने के तुरन्त बाद जोड़ों में दर्द महसूस होना,
-ज्वाइंट पर सूजन का एहसास होना
-दुर्घटनाग्रस्त ज्वाइंट का अपने आकार से बड़ा दिखना
-ठंड में ज्वाइंट पेन रहना।
-घुटनों को हिलाने-ढुलाने में परेशानी होना।

ऐसे पा सकते हैं ऑस्टियोआर्थराइटिस पर काबू

-सुबह-शाम नियमित रूप से व्यायाम करें।
-पोष्टिक व संतुलित आहार लेँ।
-अपने आहार में ग्लूकोसमीन और कोन्ड्रायटिन सल्फेट जैसे तत्वों को भी शामिल करें। इनसे कार्टिलेज मजबूत होते हैँ।
-अपने वैट कंट्रोल रखें।
-दर्द से राहत पाने के लिए पेनकीलर का इस्तेमाल ना करें। चिकित्सक से संपर्क कर पूरा ट्रीटमेंट कराएं।
-दर्द ज्यादा रहता है तो फीजियोथैरेपी की मदद ले सकते हैं।

हद से ज्यादा हो दर्द तो करा सकते हैं सर्जरी

वैसे तो ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीडित व्यक्ति इसे शुरूआती स्तर पर अपनी जीवनशैली में बदलाव कर रोक सकते हैं। लेकिन यदि शुरूआती स्तर पर लापरवाही बरती गई है और अब आॅस्टियोआर्थराइटिस अपने अंतिम चरण में है तो इसके लिए सर्जरी का विकल्प बेस्ट माना जाता है। इस सर्जरी में घुटने के क्षतिग्रस्त हिस्से को मेटल या प्लास्टिक के आर्टिफिशियल वस्तुओं द्वारा बदला जाता है। अब नी रिप्लेसमेंट सर्जरी से पूरे घुटने को भी बदला जा सकता है। नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद मरीज को दर्द से राहत मिलती है और घुटना फिर से काम करना शुरू कर देता है। घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी 55 साल से ऊपर के व्यक्ति ज्यादा कराते हैं। इस प्रकार की सर्जरी कराने से 15 से 20 साल तक घुटने सही रहने का विशेषज्ञ दावा करते हैं।

क्या है रुमेटॉइड आर्थराइटिस

इस प्रकार के आर्थराइटिस में शरीर के दोनों हिस्सों के ज्वाइंट प्रभावित होते हैं जैसे दोनों कोहनियों के ज्वाइंट, दोनों घुटनों के ज्वाइंट आदि। इसी वजह से यह अन्य प्रकार के आर्थराइटिस से ज्यादा गंभीर माना जाता है। रुमेटॉइड आर्थराइटिस में तेज दर्द पीड़ित को परेशान करता है। इसमें ज्वाइंट कैप्सूल्स में सूजन भी पैदा हो जाती है। यह त्वचा, आंख, हार्ट आदि को भी प्रभावित करता है। आर्थराइटिस का यह प्रकार हर व्यक्ति को अलग अलग तरह से प्रभावित करता है। कुछ मरीजों में ज्वाइंट पेन बहुत सालों के बाद दिखाई देना शुरू होता है तो कुछ में बहुत जल्दी। कई बार रुमेटॉइड शार्ट टर्म के लिए भी हो जाता है। आमतौर पर यह पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है।

 यह है रुमेटॉइड आर्थराइटिस के लक्षण

-दोनों ज्वाइंट में एक साथ दर्द महसूस करना
-ज्वाइंट में सूजन रहना
-मांशपेशियों में कमजोरी रहना
-हल्का बुखार महसूस होना
-लंबे समय तक बैठने के बाद ज्वाइंट में अकडाहट हो जाना

ओमेगा 3 फैटी एसिड है फायदेमंद

रुमेटाइड आर्थराइटिस में ओमेगा 3 फैटी एसिड से मरीज को अत्याधिक लाभ मिलता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड को पर्याप्त मात्रा में लेने से रुमेटॉयड आर्थराइटिस पर कंट्रोल किया जा सकता है। ओमेगा 3 फैटी एसि़ड मछलियों और फिश आॅयल से मिल सकता है। मरीज से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

 ईलाज है जरूरी

रुमेटॉइड आर्थराइटिस में ट्रीटमेंट बहुत जरूरी है। शुरूआती स्तर पर चिकित्सक दवाइयों के माध्यम से इस पर काबू पाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए पीडित का ब्लड टेस्ट लिया जाता है। ब्लड टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर मरीज का ट्रीटमेंट शुरू किया जाता है। ट्रीटमेंट के साथ-साथ इस प्रकार के आर्थराइटिस से पीड़ित व्यक्ति को आराम की भी सख्त जरूरत होती है।  इसलिए मरीज को पर्याप्त मात्रा में आराम करना चाहिए। साथ ही दिनचर्या में भी विशेष बदलाव जरूरी है। सुबह शाम व्यायाम बिमारी में काफी लाभ पहुंचा सकता है।

सोरायटिक आर्थराइटिस

यह आर्थराइटिस का वह प्रकार है जो सोराइसिस से ग्रस्त पीड़ितों में होता है। स्किन पर सोराइटिक धीरे-धीरे सोराइटिक आर्थराइटिस में बदल सकता है। यदि सही समय पर इलाज नहीं कराया तो यह हड्डियों के जोड़ को खराब कर देगा। उसके बाद उसे ठीक कर पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। सोराइटिक आर्थराइटिस में शरीर को अंग प्रभावित हो सकता है। सोराइटिक आर्थराइटिस का कोई पूर्ण ईलाज अभी तक नही है लेकिन चिकित्सक लक्षणों के आधार पर इसे कंट्रोल करने के लिए ट्रीटमेंट करते है। लापरवाही बरतने पर समय के साथ साथ यह बिमारी ओर अधिक गंभीर हो जाती है। सोराइटिक अर्थराटिस आमतौर पर तब होता है जब शरीर के अंदर इम्यूनिटी सिस्टम शरीर में मौजूद हैल्दी सेल्स और टिश्यू पर हमला करना शुरू कर देते हैं। इसी वजह से ज्वाइंट में दर्द और स्कीन सेल्स का जरूरत से ज्यादा उत्पादन होता है।

 यह है सोराइटिक आर्थराइटिस के लक्षण

-एक साइड के ज्वाइंट या दोनों साइड के ज्वाइंट में लगातार दर्द रहना
-अंगुलियों और अंगूठों में सूजन होना
-बैक पेन महसूस होना

 सोराइटिक आर्थराइटिस में जीवनशैली में यह बदलाव है महत्वपूर्ण

-वजन को संतुलित रखें।
-खासतौर पर महिलाएं ज्यादा वजन ना उठाएँ।
-नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
-दर्द से राहत पाने के लिए गर्म और ठंडे पैक का इस्तेमाल करेँ।

(मैक्स अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एल तोमर से बातचीत पर आधारित)

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