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हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग ने पेश किया था दो राष्ट्र का सिद्धांतः आनंद शर्मा

नई दिल्ली। राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक -2019 (नासंवि) का विरोध करते हुए कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि दो राष्ट्र का सिद्धांत हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग ने दिया था जिसमें ब्रिटिश सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि दो राष्ट्र का सिद्धांत कांग्रेस का था।

राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा प्रस्तुत नासंवि पर चर्चा की शुरुआत करते हुए शर्मा ने कहा कि यह विधेयक संविधान की मूल भावना के खिलाफ है इसलिए कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक न सिर्फ संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है बल्कि यह उसकी आत्मा को भी ठेस पहुंचाता है और यह भारतीय गणतंत्र पर एक तरह से हमला है।

उन्होंने कहा कि दो राष्ट्र का सिद्धांत पहली बार 1937 में अहमदाबाद में हिन्दू महासभा के सम्मेलन में पेश किया गया था जिसकी अध्यक्षता वीर सावरकर ने की थी। इसके बाद 1938 में मुस्लिम लीग की बैठक में देश विभाजन का प्रस्ताव पारित किया गया था। शर्मा  ने कहा कि भारत विभाजन के पीछे अंग्रेजों की भी भूमिका थी। उन्होंने कहा कि आखिर गृहमंत्री को इन बातों का भी उल्लेख करना चाहिए किंतु वह ऐसा क्यों नही कर रहे । वह विभाजन का दोष कांग्रेस पर क्यों लगाते हैं, यह गलत है। उन्होंने कहा कि इतिहास को बदला नहीं जा सकता। कांग्रेस नेता ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने नागरिकता के मामले में धर्म को आधार नहीं बनाया था ।

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