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अब दिल्ली-हरिद्वार-देहरादून रूट पर चलेगी तेजस जल्द

उत्तराखंड के लिए खुशखबरी। दिल्ली से हरिद्वार होते हुए देहरादून तक तेजस ट्रेन दौड़ने वाली है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना हकीकत बनने जा रही है। अगले ढाई साल में श्रीनगर तक रेल पहुंचा दी जाएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को नई दिल्ली में रेल मंत्री पीयूष गोयल से भेंट कर उत्तराखण्ड में रेल सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा की।

  • पाथ-वे मिलते ही दिल्ली-हरिद्वार-देहरादून के लिए चलेगी तेजस ट्रेन।
  • रेल मंत्री ने उत्तराखण्ड के लिए बजट की कमी नहीं आने देने के प्रति आश्वस्त किया।
  • हरिद्वार कुम्भ के लिए प्रयागराज की तर्ज पर रेलवे करेगा व्यवस्थाएं।

रेल मंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य की रेल परियोजनाओं के लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर उन्होंने दिल्ली-हरिद्वार-देहरादून के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस तेजस ट्रेन शुरू करने की सैद्धांतिक सहमति जता दी। उन्होंने कहा कि पाथ-वे उपलब्ध होते ही इसे शुरू किया जाएगा। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजनाओं में इनोवेटिव काम किया जाएगा।
उत्तराखण्ड में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर काम दिखने लगा है। इसके लिए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री और उनकी टीम की प्रशंसा की जानी चाहिए। हमें दूसरे राज्यों में जो समस्याएं आती है, उत्तराखण्ड में नहीं आई। पूरा प्रयास रहेगा कि अगले ढ़ाई वर्ष में श्रीनगर गढ़वाल तक रेल पहुंचा दी जाए। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में इनोवेटिव काम किया जाएगा। वर्ष 2021 मे हरिद्वार में होने वाले कुम्भ मेले के लिए रेलवे विभाग, प्रयागराज की भांति ही पूरी तैयारी करेगा। देहरादून, हरिद्वार स्टेशनों की सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि 126 किमी लंबी उक्त रेलवे लाइन के अंतर्गत वन भूमि को गैर वन भूमि में परिवर्तित करने की स्वीकृति मिल चुकी है। 167 निजी राजस्व भूमि का अधिग्रहण किया गया है। परियोजना के लिए जियो टेक्नीकल इन्वेस्टीगेशन पूरा हो चुका है। एक रोड अंडर ब्रिज व एक रोड ओवर ब्रिज तैयार किया गया है। इन्हें नियमित यातायात के लिए खोला गया है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना बनने के बाद से क्षेत्र में रेल यातायात में वृद्धि होगी। इसके मद्देनजर उन्होंने हरिद्वार-रायवाला या हरिद्वार-देहरादून के बीच रेल लाइन दोहरीकरण और पुराने ऋषिकेश में भारी माल लादने व उतारने व कंटेनरों से लदे रेल वैगनों के रुकने के लिए रेल कंटेनर डिपो स्थापित करने की जरूरत बताई।

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