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स्वार्थी हैं हल्द्वानी के व्यापारी नेता! व्यापारियों ने ही लगाया आरोप!

SATYAVOICE.COM के लिए रिपोर्टर कुंवर पवन प्रताप सिंह की रिपोर्ट

कोरोना लॉक डाउन के इस मुश्किल दौर में हल्द्वानी में व्यापारी नेताओं की आपसी लड़ाई खुलकर सामने आ गई। और तो और रहे जिन व्यापारियों के नेता बनने का कुछ लोग दावा करते हैं उन पर अब व्यापारियों ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के 60 से ज्यादा बड़े व्यापारियों ने शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह को ज्ञापन सौंपा और अपने ही व्यापारी नेताओं पर स्वार्थी और मतलबी होने का आरोप लगाया। सिटी मजिस्ट्रेट को लिखी चिठ्ठी में व्यापारियों ने लिखा कि कोई संगठन व्याापारियों का प्रतिनिधित्व नहीं करता। सब अपनी-अपनी स्वार्थ की दुकानें चला रहे हैं। व्यापारियों ने नेताओं के अधिकारों पर भी सवाल उठाए हैं।

व्यापारी नेताओं से नाराज हल्द्वानी के व्यापारियों के हस्ताक्षर

दरअसल व्यापारी पिछले सप्ताह के फैसले से नाराज हैं। व्यापारियों का आरोप है कि कुछ लोग खुद को नेता बताकर  प्रशासनिक बैठकों में शामिल हो रहे हैं। और अपनी दुकान की स्थिति देखकर ये फैसला करवा रहे हैं कि कौन सी दुकान खुलेगी और कौन सी नहीं। जिसमें इन नेताओं के अपने स्वार्थ छिपे हुए हैं।

हल्द्वानी में कुकुरमुत्ते की तरह उग गए हैं व्यापारी संगठन 

हल्द्वानी और उसके आस-पास के इलाकों में व्यापारी संगठन के नाम पर कुछ लोग अपनी दुकानदारी चमका रहे हैं। आए दिन इनकी फोटो व्यापारी नेता के तौर पर अखबारों में छायी रहती हैं। लेकिन व्यापारियों की शिकायत भरी चिठ्ठी ने इन संगठनों के काम काज पर सवाल उठा दिए हैं। खास बात ये है कि सभी व्यापारी संगठनों पर जातीय और क्षेत्रीय गोलबंदी का आरोप लगता रहा है।

किसी भी संगठन को हासिल नहीं है व्यापारियों का भरोसा 

व्यापारी नेताओं से नाराज हल्द्वानी के व्यापारियों के हस्ताक्षर

व्यापारियों के विरोध से साफ है कि खुद को व्यापारी नेता कह कर हमेशा अखबारों में प्रवचन देने वाले संगठनों के इन लोगों का असल में व्यापारियों का साथ हासिल नही हैं।

ये हैं हल्द्वानी के व्यापारी संगठन 

हल्द्वानी में कई सारे व्यापारी संगठन हैं। एक व्यापारी नेता हंसते हुए कहते हैं कि आप किस संगठन की बात कर रहे हैं यहां तो कई सारे हैं। जिनमें देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल, देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल, प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल, प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल प्रमुख हैं। कोई संगठन सुनार चलाते हैं तो कोई बर्तन, कपड़े, वैल्डिंग, ढाबा चलाने वाले दुकानदार। लेकिन व्यापारी संगठनों की ये खिचड़ी में ये तय करना पाना असंभव है कि कौन सा व्यापारी संगठन व्यापारियों के हित के लिए है और कौन सा व्यापारी नेताओं के अपने हित के लिए। लेकिन शुक्रवार के व्पापारियों के ज्ञापन से व्यापारी नेताओं की दुकानों की चमक थोड़ी फीकी पड़ना तय है। क्योंकि जिनका विश्वास खुद व्यापारी नहीं करते उन्हें प्रशासन कितनी गंभीरता से लेगा ये अपने आप में सवाल है।

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