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विशेष खबर: कैलाश मानसरोवर यात्रा हुई आसान, लिपुलेख तक बनी पहली सड़क का हुआ उद्घाटन, पढिए सत्य वॉयस की रिपोर्ट

कैलाश मानसरोवर यात्रा अब आसान हो जाएगी। यात्रियों को अब कम पैदल चलना पड़ेगा साथ ही यात्रा करने में पहले के मुकाबले 5 दिन कम लगेंगे। उत्तराखंड के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर बीआरओ ने लिपुलेख दर्रे से पांच किलोमीटर पहले तक सड़क तैयार कर ली है। चीन सीमा पर सुरक्षा के लिहाज से देश की ताकत और बढ़ने जा रही है। 14 साल के अथक प्रयास के बाद गर्बाधार-लिपुलेख तक बनी सीमांत की सामरिक महत्व वाली पहली सड़क को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश को समर्पित किया। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुए इस उद्घाटन समारोह में कैलास मानसरोवर तक बनीं इस लिंक का शुभारंभ किया। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल मनोज मुकुंद भी मौजूद थे।

बता दें कि ये सड़क बनने से हमारी सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवान साजो-सामान के साथ चीन बॉर्डर तक 3 दिन के बजाए तीन से चार घंटे में पहुंच जाएंगे। आईटीबीपी और एसएसबी और मजबूत होगी। उद्घाटन के साथ ही सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल व सीमा सड़क संगठन के वाहन चीन सीमा तक पहुंचने लगेंगे। इस सड़क से कैलास मानसरोवर यात्रा, आदि कैलास यात्रा, भारत-चीन व्यापार की भी राह आसान हो जाएगी।

जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ से लिपुलेख तक सड़क मार्ग की दूरी 216 किमी है। मुख्यालय से गर्बाधार तक सड़क पहले से थीए लेकिन गर्बाधार से चीन सीमा पर अंतिम भारतीय पड़ाव लिपुलेख तक सड़क का अभाव हमेशा खलता रहा। बीआरओ ने इसी 76 किमी लंबी दुरुह सड़क का निर्माण कार्य 2006 में शुरू किया था जो अब पूरा हो गया है। यह पिथौरागढ़ में चीन सीमा तक पहली सड़क है।

ऐसे हुआ ऑनलाइन उद्घाटन

नैनी सैनी हवाई पट्टी पर दिल्ली से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ये उद्घाटन किया।बीआरओ के मुख्य अभियंता विमल गोस्वामी यहां पहुंचे। साथ में बीआरओ के कर्नल सोमेंद्र बनर्जी हवाई पट्टी पर मौजूद रहे।

व्यास घाटी के सात गांव पहली बार सड़क से जुड़े

सीमांत जिले में स्थित व्यास घाटी के 7 गांव बूंदी, गर्ब्याग, गुंजी, नाबी, रौगकोंग, नपलच्यू और कुटी गांव सड़क से जुड़ गए हैं।

कैलास मानसरोवर यात्रा भी वाहनों से हो सकती है

अब प्रसिद्ध कैलास मानसरोवर यात्रा भी वाहनों से हो सकेगी। वाहनों से यात्रा होने पर पैदल पड़ाव नहीं होंगे। आधार शिविर धारचूला से चीन सीमा तक पहुंचने में 5 घंटे के आसपास समय लगेगा। प्रतिवर्ष जून से शुरू होने वाला भारत-चीन व्यापार भी इससे गति पकड़ेगा। अभी तक व्यापारियों को नजंग से आगे सामान घोड़े व खच्चरों से ले जाना पड़ता था।

ॐ पर्वत व आदि कैलास के दर्शन करना आसान

सड़क ने अब ॐ पर्वत और आदि कैलास पहुंचना भी आसान कर दिया है। दिल्ली से अब ॐ पर्वत पहुंचने में मात्र दो दिन का समय लगेगा। दिल्ली से पिथौरागढ़ तक सफर 18 घंटे का है। पिथौरागढ़ से धारचूला साढ़े तीन घंटे और धारचूला से ॐ पर्वत तक लगभग पांच घंटे का सफर रहेगा।

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