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सिसौली में गन्ना किसान आत्महत्या प्रकरण: गन्ना मंत्री इस्तीफा दें- चौधरी पुष्पेन्द्र सिंह

किसानों की राजधानी, भारतीय किसान यूनियन के गढ़ और टिकैत परिवार के गाँव सिसौली, जनपद मुज़फ्फरनगर के एक गन्ना किसान की आत्महत्या का प्रकरण शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। ज्ञात हो कि गत 4 जून को गन्ने की पर्ची ना मिलने और खेत में गन्ना बाकी रहने से व्यथित सिसौली के एक किसान ने अपने खेत के पास एक पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली थी। इस विषय में प्रशासन ने लीपापोती करते हुए पहले तो इसे पारिवारिक विवाद का रंग देने की भी कोशिश की। परन्तु किसानों के धरने और स्थानीय नेताओं के दबाव में 5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा कर दी। इसके अलावा मुज़फ्फरनगर के सांसद और केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने दिवंगत किसान के परिवार को पांच लाख रुपये, सपा व रालोद ने एक-एक लाख रुपये देने की घोषणा की।
इस विषय में सत्य वॉयस से बातचीत में किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेन्द्र सिंह ने कहा,”चीनी मिल द्वारा एक गन्ना किसान का गन्ना ना खरीदे जाने के कारण हमारे किसान भाई की आत्महत्या बहुत ही दुःखद घटना है। सरकार खेतों में खड़े किसानों के सारे गन्ने की खरीद सुनिश्चित करे, जिससे ऐसे अतिवादी कदम उठाने के लिए किसान मजबूर ना हों। हमारे इस किसान भाई के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, बच्चों की पढ़ाई की मुफ्त व्यवस्था, लड़कियों की शादी का सारा खर्चा, पत्नी को दस हजार रुपये की मासिक पेंशन दी जाए। इस प्रकरण में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्यवाही की जाए। इस वक्त उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का लगभग 16,000 करोड़ रुपये का चीनी मिलों पर बकाया है। इस राशि का भुगतान भी सरकार शीघ्र करवाए। यदि इन मांगों पर शीघ्र कारवाही नहीं की गई, तो उत्तर प्रदेश के किसान आगामी चुनावों में इस सरकार का खुलकर विरोध करेंगे।”
इसके अलावा एक वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने उत्तर प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा को मांगे ना माने जाने पर इस्तीफा देने की मांग की। ज्ञात हो कि इस वर्ष उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने 4 जून तक लगभग 35,500 करोड़ मूल्य के 1111 लाख टन गन्ने की पेराई कर 126 लाख टन चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन किया है। प्रदेश की 119 चीनी मिलों में से अधिकांश ने इस पेराई सत्र का समापन कर दिया है। जो चंद चीनी मिलें अभी पेराई कर रही हैं, वो भी जल्द ही इस सत्र का समापन करने वाली हैं। अतः गन्ना किसानों के लिए मिल बंद होने से पहले अपना सारा गन्ना मिलों को देना अत्यंत आवश्यक है।
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