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गन्ना किसानों पर कांग्रेस का सदन से लेकर सड़क तक हंगामा

देहरादून ।  को गन्ना किसानों के मसले को लेकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस ने सड़क से लेकर सदन तक विरोध दर्ज किया । पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने विधानभवन के नजदीक धरना दिया तो पार्टी विधायकों ने सदन में सरकार को घेरा। उनका कहना था कि पेराई सत्र शुरू होने के बावजूद अभी तक न तो गन्ने का समर्थन मूल्य घोषित हुआ और न बकाये का भुगतान ही किसानों को किया गया। हालांकि, संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि गन्ना किसानों को लेकर सरकार गंभीर है। हफ्तेभर के भीतर गन्ना मूल्य घोषित कर दिया जाएगा। उनके जवाब से कांग्रेस विधायक संतुष्ट नहीं हुए और वेल में आकर हंगामा किया।

सदन की कार्रवाई शुरू होते ही कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने गन्ना किसानों के मुद्दे पर नियम 310 में चर्चा की मांग की। पीठ से इस मुद्दे को नियम-58 के तहत चर्चा की बात पर आश्वासन मिलने पर विपक्ष शांत हुआ। बाद में इस मुद्दे पर विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि एक तरफ किसानों की आय दोगुना करने का राग अलापा जा रहा, वहीं सरकार गन्ना किसानों की उपेक्षा कर रही है। उन्होंने डीजल, यूरिया, डीएपी के दामों, गन्ना तौलाई के आंकड़े पेश कर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।  साथ ही गन्ना मूल्य के दामों वृद्धि और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश ने कहा कि सरकार किसानों के हित में तुरंत निर्णय ले। विधायक गोविंद कुंजवाल, फुरकान अहमद, आदेश चौहान, ममता राकेश को जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री कौशिक ने कहा कि गन्ना मूल्य निर्धारण को परामर्श समिति बनी है। उसे जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है और सप्ताहभर में मूल्य घोषित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी चीनी मिलों पर जो बकाया है, उसके भुगतान को 58 करोड़ की व्यवस्था कर रहे हैं। साथ ही निजी क्षेत्र की चीनी मिलों के बूस्टअप को भी कदम बढ़ाए गए हैं।

सीएम ने साधा हरीश रावत पर निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत  गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर विरोध प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री  त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि हरीश रावत जिस पेड़ को लगाते हैं उसे ही उखाड़ते हैं. मौजूदा सरकार ने गन्ना किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये है. जिसमें राजकीय कोष से 200 करोड रुपए गन्ना किसानों को भुगतान किया गया है, प्राईवेट शुगर मिलों को 36 करोड रुपए सहकारी बैंक से लोन दिया गया है. इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण निर्णय सरकार ने लिये है जो हरीश रावत भी जानते हैं.

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