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इस अध्यापक ने कठिन तपस्या से पहाड़ में बोये शिक्षा के बीज

पहाड़ों के दुर्गम हालात से कौन वाकिफ नहीं है। यहां परिस्थितियां अक्सर जीवन के विपरित चलती हैं। ऐसे में अगर कोई अध्यापक व्यक्तिक सुख न देखकर लोगों का भविष्य संवारने में लग जाए तो यह तारीफ के काबिल ही है। ऐसा ही काम किया है भास्कर जोशी ने।

अल्मोड़ा के एक गांव में साधारण प्राइमरी स्कूल खोलकर बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करने वाले जोशी बिना किसी आर्थिक स्वार्थ के यह काम कर रहे हैं। उनके इस प्रयास ने इतनी ख्याति बटोरी कि हाल ही में केंद्र सरकार ने उन्हें नवाचारी अवार्ड से नवाजा है। इतना ही नहीं, अरविंदो सोसायटी ने उन्हें लेकर एक पुस्तक भी प्रकाशित की है।

वर्तमान में इस स्कूल में कंप्यूटर, स्मार्ट क्लास, फर्नीचर, पेयजल, खेलकूद का सामान, प्रोजेक्टर आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही शाम के समय बच्चों को ट्यूशन देने के लिए गांव की ही शिक्षित युवतियों को नियुक्त किया गया है। हालांकि परिस्थितियों के चलते मानदेय डेढ़ हजार रुपये रखा गया है।

बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए जोशी समय-समय पर नए कोर्स तैयार करते रहते हैं। उनकी रूचि के अनुसार कई तरह के कार्यक्रम भी आयोजित करते रहते हैं। जोशी का प्रयास है कि निकट भविष्य में इसी स्कूल परिसर में क्षेत्र के पढ़े-लिखे बेरोजगारों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण भी मिले।

जोशी के लिए इस मुकाम तक पहुंचना कभी भी आसान नहीं था, शुरुआत में उन्हें घर घर जाकर लोगों से बात करनी पड़ी। फिर पैसे का इंतेजाम और बाकी चीजें जुटाना बंजर जमीन पर खेती करने के बराबर था। लेकिन आज उनके प्रयासों ने पहाड़ों में शिक्षा के बीज बो दिए हैं।

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