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उत्तराखंड विधानसभा सत्र : महंगाई के मुद्दे पर घमासान

उत्तराखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र चार दिसंबर से शुरू हो गया है। सत्र के पहले दिन विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने महंगाई के मुद्दे पर सदन में जम कर हंगामा किया। कुछ कांग्रेस विधायक हाथ में तख्तियां और गले में प्याज की माला पहन कर विधानसभा में पहुंचे। विधायकों के इस बर्ताव पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद्र अग्रवाल ने आपत्ति जताई।

नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश समेत अन्य विधायकों ने सरकार से महंगाई को लेकर तीखे सवाल किए। सरकार की तरफ से मंहंगाई रोकने के संबंध में दिए गए जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन का वाकआउट किया और बाहर चले आए।

दूसरी तरफ विधानसभा के बाहर भी कांग्रेस ने महंगाई के विरोध में प्रदर्शन किया। प्याज की कीमतों में लगातार हो रही बढोतरी के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने  प्याज की माला पहन कर सांकेतिक विरोध किया।

विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने सदन में तीन विधेयक- फल पौधशाला विधेयक, राज्य विधान मंडल (अनर्हता निवारण) संशोधन विधेयक, माल और सेवा कर संशोधन विधेयक पेश किए।

साथ ही छह अध्यादेश- उत्तराखंड मंत्री (वेतन भत्ता और प्रकीर्ण उपबन्ध ) संशोधन विधेयक 2019 अध्यादेश,उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमीदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950) संशोधन अध्यादेश, उत्तराखंड/उत्तर प्रदेश लोक सेवा शारीरिक रूप से विकलांग स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) अधिनियम 1993 संशोधन अध्यादेश, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद संशोधन विधेयक 2019 अध्यादेश, उत्तराखंड पंचायती राज ( द्वितीय संशोधन) अध्यादेश. और भूतपूर्व मुख्यमंत्री (सुविधा आवासीय एवं अन्य सुविधाएं) अध्यादेश भी पेश किए।

महंगाई के मुद्दे पर चर्चा के दौरान संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में 18 हजार करोड़ रुपये का निवेश आया है जिसके चलते 40 हजार लोगों को रोजगार मिला है।

मदन कोशिक ने दावा किया कि वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद से पिछले वर्ष 2018 तक भी प्रदेश में कुल इतना ही निवेश आया है।

संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक के इस दावे पर नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में सबसे ज्यादा निवेश वर्ष 2002 से 2007 के बीच एनडी तिवारी सरकार के कार्यकाल में आया।

सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों ने गैरसैंण में विधानसभा सत्र न कराए जाने को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गैरसैंण में सत्र न कराए जाने के विरोध में गैरसैंण पहुंच कर तीन घंटे का सांकेतिक उपवास रखा। गैरसैंण में आयोजित उपवास कार्यक्रम में कांग्रेस के कई पूर्व विधायक एवं कार्यकर्ता भी पहुंचे।

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