Uttarakhand News | उत्तराखंड की ताजा खबरें

Vizag Gas Leak: स्टाइरीन गैस लीक होने से हुआ हादसा, स्टाइरिन गैस शरीर को पहुंचाती है कितना नुकसान, बता रही है हमारी स्टोरी

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित एक प्लांट में अचानक केमिकल गैस लीक होने से बड़ा हादसा हो गया। यहां एक बच्ची समेत 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इसके अलावा 5000 से अधिक लोग बीमार हो गए हैं जिन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा है। कई लोग अभी भी सड़कों पर बेहोश पड़े हुए हैं और कई आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ बता रहे हैं।

जगह-जगह सड़कों पर बेहोश पड़े गिरे हुए थे लोग
विशाखापत्तनम में जिस जगह पर गैस लीक हुई, उसके 3 किलोमीटर के दायरे में दहशत फैल गई। सड़कों पर लोग बेसुध पड़े हुए मिले। कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी तो कई शरीर पर चकत्ते पड़ने और आंखों में जलन की शिकायत कर रहे थे। टीवी फुटेज में मोटरसाइकल सवारों को उस पर गिरते हुए देखा जा सकता है। असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर स्वरूप रानी ने बताया, ‘हम तुरंत मौके पर पहुंचे। हवा में गैस को मसूस किया जा सकता था और हममें से किसी के लिए भी वहां 5 मिनट या उससे कुछ मिनट ज्यादा समय तक टिकना संभव नहीं था।’
एलजी पॉलिमर्स के प्लांट से लीक हुई गैस
यह गैस साउथ कोरियन कंपनी एलजी पॉलिमर्स के प्लांट से लीक हुई। इस प्लांट में पॉलिस्टाइरीन बनाई जाती है यानी ऐसी प्लास्टिक जिसका खिलौनों, तमाम उपकरणों, इलेक्ट्रिक फैन के ब्लेड्स से लेकर कप, कल्टरी और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को रखने वाले कंटेनर जैसी चीजों को बनाने में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। प्लांट में स्टाइरीन गैस का इस्तेमाल इसी प्लास्टिक को बनाने के लिए हो रहा था। यह प्लांट विशाखापत्तनम शहर के बाहरी हिस्से में स्थित है।
5-5 हजार टन के 2 टैंकों से लीक हुई गैस
विशाखापत्तनम के बाहरी हिस्से में नायडू थोटा इलाके में एलजी का वह प्लांट है, जहां से गैस लीक हुई। एक स्थानीय पुलिस अफसर ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि प्लांट में बने 5-5 हजार टन के 2 टैंकों से गैस लीक हुई। मार्च में लॉकडाउन लागू होने के बाद से ही टैंकों की देखभाल के लिए वहां कोई तैनात नहीं था।

एथनीलबेन्जीन या स्टाइरीन गैस के लीक होने से हुआ हादसा
जो केमिकल लीक हुआ है वह स्टाइरीन है जिसे एथनीलबेन्जीन भी कहा जाता है। यह एक ऑर्गेनिक कंपाउंड है। यह एक सिन्थेटिक केमिकल है जो रंगहीन लिक्विड के रूप में दिखता है। हालांकि, काफी समय से इस गैस को रखा जाए तो यह हल्के पीले रंग की दिखती है। स्टाइरीन बहुत ही ज्वलनशील होती है और जब यह जलती है तो बहुत ही जहरीली गैस रिलीज करती है। होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल ऐंड रिसर्च सेंटर के पूर्व डायरेक्टर डॉक्टर डी रघुनाथ राव के मुताबिक स्टाइरीन का इस्तेमाल मुख्य तौर पर पॉलिस्टिरीन प्लास्टिक बनाने में किया जाता है।
कितनी खतरनाक है यह गैस?
इस गैस की चपेट में आने से सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम बुरी तरह खराब हो सकता है। सुनने की क्षमता भी खत्म हो सकती है और दिमागी संतुलन खत्म हो सकता है। बाहरी वातावरण में आने के बाद स्टाइरीन ऑक्सिजन के साथ आसानी से मिक्स हो जाती है। नतीजतन हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगती है। इसके संपर्क में आने के बाद लोगों के फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है और वे घुटन महसूस करने लगते हैं। यह गैस बाद में दिमाग और रीढ़ की हड्डी पर भी असर डालती है। इस वजह से गैस के संपर्क में आने वाले स्थानीय लोग सड़कों पर इधर-उधर गश खाकर गिर पड़े। कुछ डॉक्टरों ने बताया कि स्टाइरीन न्यूरो-टॉक्सिन गैस है, जिसके संपर्क में आने के बाद सांस लेने में दिक्कत होती है। इससे 10 मिनट के भीतर प्रभावित व्यक्ति की मौत हो सकती है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.