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चीन और भारत की नज़र श्रीलंका के चुनाव पर क्यों टिकी है?

चुनावी मैदान में रिकॉर्ड 35 प्रत्याशी उतरे हैं लेकिन पूर्व गृह सचिव गोतबया राजपक्षे और आवास मंत्री सजित प्रेमदासा वो दो प्रत्याशी हैं जिनके बीच कड़ी स्पर्धा मानी जा रही है.नए राष्ट्रपति को तेज़ी से कई काम निबटाने होंगे क्योंकि 2020 में संसदीय चुनाव होने हैं और देश की अर्थव्यवस्था सुस्ती की चपेट में है, भ्रष्टाचार चरम पर है और साथ ही जातीय तनाव भी कहीं व्याप्त है.

अप्रैल में इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने श्रीलंका में ईस्टर संडे के मौके पर चर्च और होटलों को निशाना बनाते हुए आठ धमाके किए थे जिसमें 250 से अधिक लोगों की जानें गई थीं. जिससे इस द्वीप की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम पर्यटन उद्योग पर बड़ी मार पड़ी.

जीत के लिए 50 फ़ीसदी वोट हासिल करने पड़ेंगे?

लगभग 2.1 करोड़ की आबादी वाले श्रीलंका में मतदाताओं की संख्या क़रीब 1.6 करोड़ है. मतदान के वक्त उन्हें अपने शीर्ष तीन नेताओं को चुनना होगा. जिस उम्मीदवार को 50 फ़ीसदी से अधिक वोट पड़ेंगे वह ही राष्ट्रपति चुने जाएंगे. अगर कोई भी प्रत्याशी 50 फ़ीसदी वोट हासिल नहीं कर पाता तो दूसरी और तीसरी वरीयता के मत से विजेता का चयन किया जाता है.

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