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यूपी में अब बिना चेहरा ढके बाहर निकलने पर होगी कार्रवाई

लखनऊ। प्रदेश में कोरोना वायरस सबसे ज्यादा युवाओं को अपना शिकार बना रहा है। अभी तक उम्रदराज लोगों पर सबसे ज्यादा खतरा बताया जा रहा था, लेकिन सतर्कता बरतने के कारण उनकी संख्या जहां सबसे कम है। युवा सबसे ज्यादा इस वायरस से संक्रमित हुए हैं। राज्य में अब कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 343 पहुंच गई है, जिसमें से 187 तब्लीगी जमाम से सम्बन्धित हैं। 26 मरीज ठीक होने पर घर भेजे जा चुके हैं।
प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित मोहन प्रसाद ने बुधवार को कोरोना संक्रमित मरीजों की केस हिस्ट्री को लेकर कहा कि 0-20 उम्र के 16 प्रतिशत, 21-40 आयु वर्ग के 44 प्रतिशत, 41-60 उम्र के 27 प्रतिशत और 60 से अधिक उम्र के 13 प्रतिशत मामले सामने आये हैं। यानि की सबसे कम और सबसे अधिक उम्र के मरीजों की संख्या कम है। उन्होंने कहा कि हम शुरुआत से ही बुजुर्गों का अधिक ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं। इसके लिए लगातार लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसका लाभ भी हुआ और परिणामस्वरूप बुजुर्ग मरीजों की संख्या सबसे कम है। आज ही पीलीभीत के एक 73 वर्षीय मरीज की रिपोर्ट भी निगेटिव आई है, उन्हे कल तक डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी हम लगातार लोगों से नीम के पत्ते, तुलसी, अदरक, गिलोई, गरम पानी का सेवन करने की सलाह दे रहे हैं।
अब रोजाना लिए जा सकेंगे 1500 जांच नूमने
उन्होंने कहा कि अब टेस्टिंग लैब की संख्या बढ़ने के साथ कोरोना के ज्यादा से ज्यादा नमूने लेने का काम किया जा रहा है। अभी हम जहां 700-800 सैम्पल प्रतिदिन ले रहे हैं, वहीं गुरुवार से इनकी संख्या दोगुनी हो जाएगी। हम लगभग 1500 नूमने रोजाना लेंगे। जहां कोरोना संक्रमण के मामले सामने नहीं आये हैं, वहां भी ज्यादा से ज्यादा सैम्पलिंग की जाएगी ताकि किसी भी क्षेत्र में इसके संक्रमण को लेकर पता लगाया जा सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि ज्यादा मामले सामने आये हैं, वहां लॉकडाउन का सख्ती से पालन किया जाए। संक्रमण जहां तक फैल गया है, उसे उसी स्तर पर रोक लिया जाए। उन्होंने कहा कि जब मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ने का सिलसिला कम हो रहा है तो ये बेहद जरूरी है कि एग्रेसिव कंटेनमेंट किया जाए।
एंटी बॉडी टेस्ट के लिए टेंडर की तैयारी
इसके साथ ही अब एंटी बॉडी टेस्ट को लेकर भी प्रभावी कदम उठाये जा रहे हैं। इसकी सप्लाई को लेकर 11 तारीख को टेंडर खोला जा रहा है। इससे पहले अगर वेंडर इसे सप्लाई कर सकते हैं, तो हम इसका इस्तेमाल करेंगे। इससे जांच में फायदा मिलेगा, इस टेस्ट में जो केस पॉजिटिव आयेंगे, केवला उनकी ही आगे जांच की जाएगी।
बिना चेहरा ढके बाहर निकलने पर होगी कार्रवाई
प्रमुख सचिव ने कहा कि तब्लीगी जमात के कारण बीते कुछ दिनों से अचानक कोरोना संक्रमित मामलों में उछाल आ गया था। अब जमात के लोगों को क्वारंटाइन करने के बाद ये स्थिति कम हुई है। लोगों की पूरी तरह से सुरक्षा के मद्देनजर अब आदेश जारी किए जा रहे हैं कि कोई भी व्यक्ति बिना चेहरे को ढके बाहर नहीं निकले,  ऐसा करने पर कार्रवाई की जाएगी।
आगरा में सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस
प्रमुख सचिव ने बताया कि अभी तक प्रदेश में कोरोना संक्रमित मामलों की संख्या 343 है। इसमें से तब्लीगी जमात से सम्बन्धित 187 मामले हैं। वहीं 26 मरीज ठीक होने पर अस्पताल से घर भेजे जा चुके हैं। प्रदेश में जिन जनपदों में कोराना वायरस संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले हैं उनमें आगरा में 64, गौतमबुद्ध नगर में 58, मेरठ में 35, गाजियाबाद में 23 और लखनऊ में 24 केस सामने आये हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सहारनपुर में 795, शामली में 243, लखनऊ में 147, आगरा में 400, मेरठ में 347 और गौतमबुद्धनगर में 657 को क्वारंटाइन किया गया है।
बेहतर व्यवस्था के लिए लागू होगी एल-1 अटैच फैसिलिटी
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि 75 प्रतिशत मामलों में लोगों में बीमारी का लक्षण नहीं मिला था, लेकिन जब जांच नूमने लिए गए तो वह कोरोना संक्रमित पाये गये। बीमारी के इलाज के लिए हमने 10000 आइसोलेशन बेड की जो व्यवस्था की है, उसको लेकर अब हमने नई रणनीति बनायी है। इसके तहत हम अस्पताल के पास ही किसी लॉज, होटल या हॉस्टल आदि बिल्डिंग को किराये पर इलाज के लिए लेंगे। यहां एक भवन में 100 से 125 बेड होंगे। इसे एल-1 अटैच फैसिलिटी या एल-1 के समकक्ष इकाई का नाम दिया गया है। यहां हमारी टीम मुस्तैद रहेगी। यहां हम लक्षण विहीन मरीजों का उपचार करेंगे। इससे अस्पताल के बेड गम्भीर मरीजों के मामले आने पर उनके लिए इस्तेमाल हो सकेंगे। इस तरह हमें 10000 बेड और उपलब्ध हो जाएंगे और कुल बेड की संख्या 20000 होगी।
पूलिंग ऑफ पेशेंट से अस्पताल और मेडिकल टीम पर दबाव होगा कम
इसके साथ ही पूलिंग ऑफ पेशेंट भी अब किया जा सकेगा। इस व्यवस्था में कहीं पूरे अस्पताल में बेहद कम मरीज होने की स्थिति में अब मंडलायुक्तों को अधिकार दिया गया है कि वह सभी मरीजों को किसी एक अस्पताल में शिफ्ट कर सकेंगे। इससे जहां अस्पतालों पर लोड कम होगा, वहीं बाकी स्टॉफ भी अधिक सुरक्षित रह सकेगा। जरूरत पड़ने पर उस टीम को अन्य जगह लगाया जा सकेगा।
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