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यूपी के शहरों में रोजगार देने का ये है योगी प्लान

केंद्र सरकार द्वारा घोषित पटरी दुकानदारों के लिए घोषित आर्थिक पैकेज को लागू करने के संबंध में नगर विकास विभाग ने अपना सुझाव भेज दिया है। इसके मुताबिक शहरी क्षेत्र के पटरी व छोटे दुकानदारों के लिए ‘मल्टीपर्पज बाजार’ बनाए जाएंगे। निजी सहभागिता यानी पीपीपी माडल पर इसका निर्माण कराया जाएगा और इसके लिए निकाय जमीन की व्यवस्था करेंगे।

एक ही स्थान पर जरूरत के सामान
प्रस्ताव के मुताबिक मल्टीपर्पज बाजार खासकर मलिन बस्तियों या झुग्गी झोपड़ी वाले स्थानों पर बनवाया जाएगा। इसके लिए पीपीपी माडल पर काम करने वालों को टेंडर के माध्यम से आमंत्रित किया जाएगा। मल्टीपर्पज बाजार बनाने वाले बिल्डर को इस स्थान पर कुछ जमीन पर अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी। शहरों में बनने वाले इस बाजार में वह सभी जरूरी सुविधाएं देने के साथ आसपास जरूरत के आधार पर छोटे-छोटे पार्क भी बनने का सुझाव है। इससे रोजगार सृजन के साथ-साथ क्षेत्र की सुंदरता में भी वृद्धि होगी।

मनरेगा की तर्ज पर रोजगार देंगे
शहरी मजदूरों का इस्तेमाल मनरेगा की तर्ज पर निर्माण कार्यों में भी किया जा सकता है। इसके लिए श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों को रोजगार दिया जा सकता है। विभाग ने सुझाव दिया है कि इसके आधार पर काफी संख्या में प्रवासी श्रमिकों व मजदूरों को रोजगार मिलने का रास्ता साफ होगा।

फेरी नीति पर अभी तक अमल नहीं
शहरी क्षेत्रों में जहां रोजगार के नए संसाधन तलाशने के सुझाव दिए जा रहे हैं, वहीं फेरी नीति पर अभी पूरी तरह से अमल नहीं हो पाया है। लखनऊ फुटपाथ व्यापार समन्वय समिति के अध्यक्ष गोकुल प्रसाद आरोप लगाते हुए कहते हैं कि यूपी में 10 मई 2017 को फेरी नीति लागू की गई है। इसके आधार पर शहरों में वेंडिंग जोन बनाते हुए पटरी दुकानदारों को अधिकतम चार वर्गमीटर की जगह देने के साथ सभी सुविधाएं दी जानी है लेकिन इस नीति के लागू होने के तीन साल बाद भी यूपी में अभी तक फेरी नीति का पूरा फायदा पटरी दुकानदारों को नहीं मिल पा रहा है। इसलिए केंद्र द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज के आधार पर अगर फेरी नीति पर ही अमल हो जाए तो बेहतर होगा।

दीपक कुमार, प्रमुख सचिव नगर विकास कहते हैं कि केंद्र सरकार के पैकेज के आधार पर सुझाव भेज दिया गया है। इस पर मंजूरी मिलने के बाद इसे अमल में लाते हुए रोजगार के संसाधन की व्यवस्था की जाएगी।

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